मेरठ में बुधवार को सामने आया एक ऐसा दृश्य जिसने हर उस व्यक्ति को हिला दिया जो वहां मौजूद था। सरूरपुर के किसान राजीव अपनी पैतृक जमीन पर चल रहे विवाद के चलते महीनों से परेशान चल रहे थे। न्याय की उम्मीद में जैसे ही वह एसडीएम सदर कार्यालय के बाहर पहुंचे, उनकी आंखों से सब्र का बांध टूट गया। भीड़ के बीच वह अचानक जमीन पर बैठ गए और जोर-जोर से रोने लगे। कहा जा रहा है कि किसान कई दौर तक अधिकारियों के पास चक्कर काट चुका था, लेकिन समाधान न मिलने से वह हताश और टूटा हुआ महसूस कर रहा था।
लेखपाल पर लगाया 10 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप
किसान राजीव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने के लिए लेखपाल सुरेंद्र ने उससे 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। किसान का कहना है कि जब उसकी जमीन पर गलत तरीके से दबाव बनाया जा रहा है, तब वह मदद की उम्मीद लेकर सरकारी दफ्तरों में जाता है, लेकिन वहां भी उसे निराशा ही मिलती है। कई दिनों से चल रही इस खींचतान ने किसान की मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था, और आखिरकार उसकी पीड़ा सबके सामने फट पड़ी।
महिला SDM ने दिखाई मानवता
जिस समय किसान रो रहा था, उसी दौरान एसडीएम सदर दीक्षा जोशी वहां पहुंचीं। किसान को इस हालत में देखकर उन्होंने तुरंत उसे उठाया, पानी दिया और शांत करवाया। उन्होंने राजीव की पूरी बात सुनी और आश्वासन दिया कि शिकायत की निष्पक्ष जांच होगी। एसडीएम का यह कदम भीड़ में मौजूद लोगों को प्रभावित कर गया, क्योंकि कुछ ही मिनट पहले जो किसान टूट चुका था, उसे पहली बार लगा कि शायद उसकी बात सुनी जाएगी। SDM ने आदेश दिए हैं कि आरोप की जांच तुरंत शुरू की जाए।
वीडियो ने सोशल मीडिया पर मचाई हलचल
इस पूरी घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, लोगों में रोष फैल गया। कई लोग प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं कि एक किसान को न्याय की मांग के लिए इस हद तक क्यों जाना पड़ा। सोशल मीडिया पर लगातार यह बहस चल रही है कि अगर सिस्टम समय पर सुनवाई करता, तो किसान को SDM के पैरों पर गिरने की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं दूसरे लोग SDM की संवेदनशीलता की भी सराहना कर रहे हैं।
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