अयोध्या में होने वाले राम मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है। लेकिन इस उत्साह के बीच जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह है राम मंदिर ध्वजारोहण न्योता इकबाल अंसारी को भेजा जाना। बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार रहे इकबाल अंसारी को जब यह निमंत्रण मिला, तो उन्होंने इसे सौभाग्य बताते हुए कहा कि अयोध्या में अब नफरत के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए, बल्कि भाईचारे और सौहार्द्र के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
अंसारी के इस बयान ने अयोध्या की हवा बदल दी और शहर में अचानक शांति व सद्भाव की नई चर्चा शुरू हो गई।
विवाद की जमीन से निकलकर सद्भाव के मंच तक पहुंचे अंसारी
इकबाल अंसारी का नाम वर्षों तक बाबरी विवाद से जुड़ा रहा। लेकिन अब जब राम मंदिर ध्वजारोहण न्योता इकबाल अंसारी को मिला, तो उन्होंने साफ कहा कि रामलला के मंदिर के निर्माण के साथ पुराने विवाद को भुलाकर आगे बढ़ने का समय आ चुका है।
अंसारी ने बताया कि वे अयोध्या में रहने वाले हर व्यक्ति की तरह शांति चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण और मुस्लिम समाज दोनों को एक-दूसरे के साथ आदर और सौहार्द से पेश आना चाहिए। उनका यह बयान अलग-अलग समुदायों के बीच भरोसा बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने पर अंसारी की साफ राय
न्योते पर प्रतिक्रिया देते हुए इकबाल अंसारी ने कहा कि “अगर मुझे बुलाया गया है, तो यह मेरे लिए सम्मान की बात है।” उन्होंने साफ किया कि मंदिर हो या मस्जिद, दोनों इंसानों के लिए शांति और प्रार्थना के स्थान हैं।
राम मंदिर ध्वजारोहण न्योता इकबाल अंसारी के संदर्भ में उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या दुनिया को एकता का संदेश देने का सबसे बड़ा मंच बन सकता है, और वे उसी भावना के साथ इस कार्यक्रम को देखते हैं। उनकी यह सोच न केवल मुस्लिम समाज में बल्कि पूरे प्रदेश में सकारात्मक संकेत भेजने वाली मानी जा रही है।
अयोध्या की बदली फिज़ा और बढ़ती उम्मीदें
राम मंदिर ध्वजारोहण से पहले ही अयोध्या में भारी भीड़ आने लगी है। लेकिन इस बीच इकबाल अंसारी को दिया गया आमंत्रण इस आयोजन को और खास बना देता है। कई लोग इसे हिंदू-मुस्लिम एकता के नए दौर की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।
राम मंदिर ध्वजारोहण न्योता इकबाल अंसारी चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि अंसारी वर्षों तक विवाद का हिस्सा रहे, लेकिन आज वही व्यक्ति एकता और सौहार्द का प्रतीक बनते दिख रहे हैं।
शहर में लोग कह रहे हैं कि अयोध्या अब केवल विवाद की पहचान नहीं, बल्कि साझी संस्कृति और सम्मान की मिसाल बनने जा रही है।
