दो पैन कार्ड मामले में मंगलवार का दिन राजनीति और न्यायपालिका—दोनों के लिए बेहद अहम साबित हुआ। एमपी-एमएलए कोर्ट में जैसे ही जज ने सपा नेता आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म का नाम पुकारा, पूरा माहौल शांत हो गया। हर किसी की नज़रें फैसले पर थी और हवा में पहले से ही तनाव महसूस किया जा सकता था। जब अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया, तो पल भर के लिए कोर्टरूम का माहौल मानो थम सा गया। आज़म और अब्दुल्ला कुछ क्षणों तक एक-दूसरे की ओर देखते रहे, जैसे समय की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई हो। उनके चेहरों पर चिंता, असुरक्षा और एक अनजाने कल का बोझ साफ दिखाई दे रहा था।
फैसले के बाद भावनाओं का उफान
सजा घोषित होने के साथ ही वातावरण में एक अजीब सी घुटन फैल गई। दोनों की आंखों में छिपा तनाव अब खुलकर नजर आने लगा। पिता और बेटे के बीच सिर्फ एक नजर का इशारा काफी था यह समझने के लिए कि परिस्थितियां कितनी भारी हो चुकी हैं। कोर्टरूम में मौजूद लोगों ने देखा कि अब्दुल्ला ने अपने पिता की ओर चिंतित नज़र से देखा और आज़म खान ने जैसे एक सुकून देने वाली आंखों से बेटे को आश्वस्त करने की कोशिश की। लेकिन फैसले की गंभीरता इतनी बड़ी थी कि दोनों के चेहरे पर किसी भी तरह की राहत का संकेत नहीं दिखा। माहौल इतना भारी था कि शब्दों की जगह खामोशी ने ले ली।
अदीब का भावुक पल
जेल जाने की औपचारिकताओं से पहले कोर्ट परिसर में ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर दिया। आज़म खान के बड़े बेटे अदीब, जो फैसले के दौरान लगातार चिंतित खड़े थे, अचानक भीड़ को चीरते हुए अपने पिता के पास पहुंचे। उन्होंने बिना किसी शब्द के पिता का गाल चूमा—एक ऐसी तस्वीर जिसने माहौल में छाई भारी खामोशी को एक पल के लिए तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई अब्दुल्ला को कसकर गले लगा लिया। तीनों के बीच उस क्षण जो भावनाएं थीं, वह किसी भी राजनीति, बयानबाज़ी या अदालत की औपचारिकताओं से कहीं ऊपर थीं। यह एक परिवार का दर्द था जो शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
आगे की कानूनी लड़ाई और बढ़ते सवाल
फैसले के बाद सपा खेमे में हलचल बढ़ गई है। आज़म खान का राजनीतिक सफर हमेशा विवादों और कानूनी चुनौतियों से घिरा रहा है, लेकिन इस मामले ने उनके भविष्य पर बड़ा साया डाल दिया है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, अगला कदम ऊपरी अदालत में अपील का होगा, ताकि सजा पर रोक या राहत मिल सके। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला न केवल आज़म खान के लिए बल्कि पार्टी की रणनीतियों पर भी प्रभाव डाल सकता है। दूसरी ओर, परिवार इस कठिन समय में एकजुट होकर मजबूती दिखाने की कोशिश कर रहा है। अदीब, अब्दुल्ला और आज़म के बीच की वह भावुक झलक इस बात का प्रमाण थी कि फैसले ने परिवार को अंदर तक हिला दिया है, लेकिन टूटने नहीं दिया।
Read More-पाकिस्तान के खिलाफ क्रीज पर अचानक ‘विराट’ की एंट्री? वीडियो ने फैंस को डबल-चेक करने पर मजबूर कर दिया
