दुनिया जैसे-जैसे 2025 के अंतिम महीनों की ओर बढ़ रही है, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भविष्यवाणियों की लहर सुनामी की तरह उठने लगी है। युद्ध, भूकंप, महामारी और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते संकटों के बीच लोग प्राचीन ग्रंथों में दर्ज उन संकेतों की ओर फिर मुड़ने लगे हैं, जिनका संबंध कलियुग के अंत से बताया जाता है। इन्हीं के बीच एक ऐसी भविष्यवाणी ने लोगों की रीढ़ में सिहरन पैदा कर दी है, जिसके अनुसार कलियुग का चरम इतना भयावह होगा कि मानव सभ्यता की पूरी संरचना बदल जाएगी।
विष्णु पुराण और भविष्य मालिका जैसे पुराने ग्रंथों में दर्ज वर्णनों को लेकर दावा किया जा रहा है कि कलियुग के अंतिम चरण में इंसान की उम्र 18–20 वर्ष तक सिमट जाएगी। कहा गया है कि बचपन और युवावस्था का अंतर खत्म हो जाएगा और लड़कियां महज 6–7 वर्ष की उम्र में मां बन जाएंगी, जबकि लड़के 8–9 वर्ष तक पिता बनने में सक्षम हो जाएंगे। यह चित्रण इतना विचलित करने वाला है कि कल्पना मात्र से ही मन में डर बैठ जाता है।
इस भविष्यवाणी का सबसे खौफनाक पहलू यह बताता है कि इंसान की लंबाई कम होते-होते सिर्फ कुछ इंच रह जाएगी। लोग कीड़े-मकोड़ों जैसी कमजोर काया के साथ जीवन जीने के लिए मजबूर होंगे। समाज में दया, करुणा और मानवता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। लोग एक-दूसरे पर अत्याचार करेंगे और हिंसा सामान्य जीवन का हिस्सा बन जाएगी। बताया गया है कि उस समय इंसान जीवन के लिए संघर्ष करेगा, जबकि पृथ्वी पर अराजकता और अव्यवस्था का बोलबाला होगा।
इंचों में सिमट जाएगी इंसान की लंबाई
विष्णु पुराण में वर्णित है कि कलियुग के आगे बढ़ते चरणों में इंसान की शारीरिक बनावट लगातार कमजोर होती जाएगी। लंबाई जहां आज औसतन 5–6 फीट है, वहीं भविष्य में वह कुछ ही इंच रह जाएगी। बीमारियों की भरमार और शरीर की तेज कमजोरी लोगों की उम्र को अत्यधिक कम कर देगी। पुराणों के अनुसार, बाल 12 वर्ष की उम्र में सफेद हो जाएंगे और व्यक्ति 18–20 वर्ष में ही मृत्यु का शिकार हो जाएगा।
मानवीय भावनाओं का ह्रास इस विनाश का सबसे बड़ा कारण बताया गया है। पुराणों में वर्णित है कि समाज झूठ, हिंसा, लालच और अत्याचार के दलदल में फंस जाएगा। रिश्ते टूट जाएंगे, विश्वास मिट जाएगा और इंसान अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद में भटकता रहेगा। यह वह समय बताया गया है जब सभ्यता गर्त में होगी और दुनिया अराजकता के कगार पर पहुंच जाएगी।
कलियुग का अंत कब? जानें
विष्णु पुराण के अनुसार कलियुग की अवधि कुल 4,32,000 वर्ष है। आश्चर्य की बात यह है कि अभी तक सिर्फ लगभग 5,126 वर्ष ही बीते हैं। इसका अर्थ है कि कलियुग का अंत लगभग 4,26,874 वर्ष बाद आएगा—यानी तकरीबन 428,899 ईस्वी के आसपास।
इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि प्राचीन ग्रंथों में दर्ज यह वर्णन भविष्य की कोई तत्काल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि एक सांकेतिक संदेश हो सकता है—एक चेतावनी कि जब समाज नैतिकता, मानवता और सत्य से दूर होने लगता है तो सभ्यता धीरे-धीरे स्वयं विनाश के मुहाने पर पहुंच जाती है।
ये भविष्यवाणियां सच होंगी या नहीं, यह समय ही बताएगा, लेकिन इतना निश्चित है कि इन कथाओं का उद्देश्य मनुष्य को उसके व्यवहार, गुणों और मूल्यों पर पुनः विचार करने के लिए प्रेरित करना है। शायद यही कारण है कि कलियुग से संबंधित ये वर्णन आज भी लोगों के मन में डर, सस्पेंस और चेतना जगाते हैं।
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