श्रीनगर का नौगाम इलाका मंगलवार की रात सन्नाटे में डूबा था, तभी 11:30 बजे एक ऐसा धमाका हुआ जिसने पूरे शहर को हिला दिया। यह विस्फोट नौगाम पुलिस स्टेशन परिसर के भीतर हुआ, जहां फॉरेंसिक टीम एक संदिग्ध वस्तु का सैंपल ले रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, नमूना लेने की प्रक्रिया के दौरान अचानक तीव्र गर्मी या दबाव के कारण विस्फोटक सक्रिय हो गया और कुछ ही सेकंड में पूरा परिसर आग के गोले में बदल गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि पास की इमारतों की दीवारें तक हिल उठीं।
घटनास्थल का मंजर किसी बड़े आतंकी हमले जैसा था—लाशें बिखरी हुईं, जमीन पर गहरे गड्ढे, और कई मीटर तक फैले अंगों के टुकड़े। चश्मदीदों ने बताया कि विस्फोट की गूंज शहर के बाहरी इलाकों तक सुनाई दी। कुछ ने इसे भूकंप जैसा झटका बताया। धुएं का गुबार इतने ऊंचाई तक उठा कि कुछ समय के लिए आसमान ही काला पड़ गया। राहत और बचाव दलों को भी भीतर की गर्मी और धुएं के कारण अंदर जाने में काफी संघर्ष करना पड़ा। हालांकि शुरुआती बयान “हैंडलिंग एरर” का संकेत देते हैं, पर धमाके की शैली कहीं न कहीं दिल्ली के लाल किले के पास पिछले महीने हुए कार ब्लास्ट जैसे पैटर्न से मेल खाती दिखाई दी।
लाल किले जैसा मंजर: दिल्ली ब्लास्ट से कितनी मिलती-जुलती है यह वारदात?
नौगाम थाने का दृश्य देखते ही दिल्ली के 10 नवंबर वाले धमाके की याद ताज़ा हो जाती है। लाल किले के पास हुए उस कार ब्लास्ट में भी विस्फोटक छोटा था, पर आघात क्षमता बेहद भयावह। ठीक वैसे ही नौगाम में धमाका हल्के संचालन के दौरान सक्रिय हुआ और अत्यधिक बड़े पैमाने पर जनहानि का कारण बना। कहा जा रहा है कि यह विस्फोट भी हाई-इंटेंसिटी इम्प्रोवाइज्ड चार्ज हो सकता है, जो झटके से सक्रिय होता है।
विशेषज्ञ इसे संयोग मानने को तैयार नहीं हैं। दिल्ली धमाके में शामिल आतंकी उमर द्वारा उपयोग किए गए विस्फोटक की प्रकृति ऐसी ही थी—छोटा, लेकिन स्पर्श या दबाव के हल्के अंतर से भी तेज़ी से सक्रिय होने वाला। नौगाम में सैंपल लेते समय टीम का मात्र उपकरण बदलना भी ट्रिगर हो सकता था। दोनों घटनाओं में यह समानता जांच एजेंसियों को एक पुराने नेटवर्क की पुन: सक्रियता की ओर इशारा कर रही है।
मृतकों की संख्या और क्षति को देखते हुए यह संदेह और गहरा हो गया है कि क्या यह “दुर्घटना” वास्तव में किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थी, या अंदर मौजूद विस्फोटक का प्रकार किसी बाहरी हस्तक्षेप से बदला गया था।
आखिर नौगाम ही क्यों? फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ी चौंकाने वाली कड़ी
एक बड़ा सवाल सबके सामने खड़ा है—धमाका नौगाम पुलिस स्टेशन में ही क्यों हुआ? इसके जवाब में कई परतें हैं, और हर परत एक खतरनाक कहानी कहती है।
दरअसल, नौगाम पुलिस ही वह टीम थी जिसने फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल का सबसे पहला सुराग पकड़ा था। यह वही मामला था जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाए गए थे, जिन्हें नौगाम पुलिस ने तुरंत सीज़ कर जांच शुरू की। इन पोस्टरों से एक बेहद पढ़े-लिखे, पेशेवर आतंकियों के नेटवर्क का खुलासा हुआ—वही नेटवर्क जिसने बाद में सुरक्षा एजेंसियों को फरीदाबाद में एक चौंकाने वाली बरामदगी तक पहुंचाया।
जांच के दौरान करीब 2900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई, जो किसी बड़े हमले की तैयारी की ओर इशारा करती थी। इस मॉड्यूल में शामिल थे कई “डॉक्टर आतंकी”—यानी ऐसे मेडिकल पेशेवर जो आतंकवाद की तकनीकी शाखा संभाल रहे थे। अक्टूबर में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर अदील अहमद राठेर को कश्मीर में धमाकों की चेतावनी देने वाले पोस्टर लगाते हुए पकड़ा गया था। उसकी गिरफ्तारी ने उस नेटवर्क का चेहरा बेनकाब किया जो 10 नवंबर के दिल्ली ब्लास्ट में शामिल था, जिसमें 13 मौतें हुईं।
अब सवाल उठता है—क्या नौगाम में धमाका उसी नेटवर्क की “बदले की कार्रवाई” थी? या यह किसी ऐसे विस्फोटक का अवशेष था जिसे मॉड्यूल के खुलासे के बाद थाने में जमा किया गया था? सुरक्षा एजेंसियां दोनों संभावनाओं पर काम कर रही हैं।
जांच की दिशा: मलबे की कहानी, फुटेज के राज और नेटवर्क की परछाइयाँ
घटना के तुरंत बाद NIA, IB और राज्य पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंच गई। सारा मलबा सुरक्षित कर लिया गया और कमरे को सील कर दिया गया जिसमें सैंपल की जांच चल रही थी। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि उपयोग किया गया विस्फोटक अत्यंत संवेदनशील था, यानी ‘ट्रिगर-रेडी’। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या किसी ने सैंपल में छेड़छाड़ की थी? या किसी ने ऐसे विस्फोटक को “सीज्ड मटेरियल” की आड़ में अंदर पहुंचा दिया?
CCTV फुटेज को फ्रेम दर फ्रेम खंगाला जा रहा है। जांच में एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया है—कुछ घंटों पहले एक संदिग्ध वाहन थाना परिसर के पास रुका था। यह वाहन किसका था, और क्या उसका विस्फोट से कोई संबंध है—इस पर जांच जारी है।
सुरक्षा एजेंसियों ने फिलहाल इस धमाके को “शक के दायरे” में रखकर जांच शुरू की है। इलाके में हाई अलर्ट जारी है, और बाहरी इलाकों से आने-जाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
