देश में आवारा कुत्तों के हमलों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि “देश की छवि खराब हो रही है और आप सभी अब भी सो रहे हैं।” न्यायमूर्ति सूर्यकांत और पीएस नरसिम्हा की पीठ ने राज्यों को फटकार लगाते हुए पूछा कि अगस्त में जारी नोटिस का जवाब अब तक क्यों नहीं दिया गया। अदालत ने कहा कि इन घटनाओं से बच्चों और बुजुर्गों की जान खतरे में है, और सरकारें इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं।
हर दिन बढ़ रहे हैं हमले, सरकारें बेखबर…
सुप्रीम कोर्ट के सामने दाखिल याचिकाओं में बताया गया कि देश के कई हिस्सों में आवारा कुत्तों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। सिर्फ पिछले दो महीनों में ही कई बच्चे इन हमलों का शिकार बने हैं। कोर्ट ने कहा, “हमारे पास रोज़ नई खबरें आती हैं—कहीं बच्चा घायल होता है, कहीं किसी बुजुर्ग पर हमला होता है। क्या ये सब इंतज़ार कर रहे हैं किसी बड़ी त्रासदी का?”
राज्यों से पूछा—“क्यों नहीं बनी कोई ठोस नीति?”
न्यायालय ने राज्यों और केंद्र से यह भी पूछा कि क्या अब तक कोई एकीकृत नीति बनाई गई है जिससे इन हमलों पर अंकुश लगाया जा सके। कोर्ट ने कहा कि जानवरों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है, लेकिन मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है। अदालत ने साफ कहा कि प्रशासनिक उदासीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अगली सुनवाई में सभी राज्यों को विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
सिर्फ कानून नहीं, संवेदना भी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान सिर्फ हिंसक तरीके से नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सुझाव दिया कि राज्य सरकारें नसबंदी, टीकाकरण और पशु आश्रय गृहों की व्यवस्था पर ध्यान दें। साथ ही यह भी कहा कि अगर कोई राज्य इस पर काम नहीं करता तो उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा।
अगली सुनवाई में देनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगली तारीख तक ठोस एक्शन रिपोर्ट दाखिल की जाए, अन्यथा कठोर कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा, “देश की साख दांव पर है। विदेशों में भारत की छवि ऐसी नहीं होनी चाहिए कि हमारे बच्चे सड़क पर सुरक्षित नहीं हैं।”
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