फिलीपींस से सामने आई यह अनोखी और चौंकाने वाली कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि एक महिला ने करीब चार साल पहले एक लोकल दुकान से हरे रंग की एक मूर्ति खरीदी थी। मूर्ति का गोल चेहरा, शांत भाव और बैठने की मुद्रा देखकर महिला को लगा कि यह भगवान बुद्ध की प्रतिमा है। महिला बौद्ध धर्म की शिक्षाओं से प्रभावित थी और उसे लगा कि यह मूर्ति उसके घर में सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगी। इसी विश्वास के साथ उसने मूर्ति को अपने घर के पूजा स्थल में स्थापित कर दिया। इसके बाद हर दिन अगरबत्ती जलाना, मन ही मन प्रार्थना करना और मूर्ति के सामने कुछ देर शांति से बैठना उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। महिला का कहना था कि उस मूर्ति को देखकर उसे मानसिक शांति मिलती थी और घर का माहौल भी सकारात्मक महसूस होता था। इसी आस्था और भरोसे के साथ वह बिना किसी शक के चार साल तक उस मूर्ति की पूजा करती रही।
बुद्ध नहीं, निकला मशहूर कार्टून कैरेक्टर श्रेक
महिला की यह आस्था उस दिन अचानक सवालों के घेरे में आ गई, जब उसका एक दोस्त उसके घर आया। दोस्त की नजर जैसे ही पूजा स्थल पर रखी मूर्ति पर पड़ी, वह मुस्कुरा पड़ा। पहले तो महिला को लगा कि शायद वह मजाक कर रहा है, लेकिन फिर दोस्त ने उसे बताया कि यह मूर्ति भगवान बुद्ध की नहीं, बल्कि मशहूर एनिमेटेड फिल्म का कार्टून कैरेक्टर ‘श्रेक’ है। बताया गया कि यह मूर्ति दरअसल श्रेक का 3D प्रिंटेड मॉडल थी, जिसे सजावट के लिए बनाया गया था। दोस्त की बात सुनकर महिला पहले तो हैरान रह गई। चार साल तक जिस मूर्ति को वह धार्मिक श्रद्धा से पूजती रही, उसके कार्टून कैरेक्टर होने की बात उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी। कुछ देर तक महिला उस मूर्ति को ध्यान से देखती रही और तब उसे सच समझ में आया। मूर्ति का हरा रंग, कानों का आकार और चेहरे की बनावट वाकई श्रेक से मिलती-जुलती थी, जिसे उसने पहले कभी गौर से नहीं देखा था।
शर्मिंदगी नहीं, हंसी में लिया सच
इस पूरी सच्चाई के सामने आने के बाद महिला ने जो प्रतिक्रिया दी, वही इस खबर को और खास बना देती है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने शर्मिंदा होने या नाराज होने के बजाय जोर-जोर से हंसना शुरू कर दिया। उसने कहा कि इतने सालों तक उसने सच्चे मन से पूजा की और उसे शांति मिली, इसलिए उसे किसी तरह का अफसोस नहीं है। महिला का मानना है कि आस्था मूर्ति में नहीं, बल्कि इंसान के दिल में होती है। यही वजह है कि उसने यह भी कहा कि वह इस मूर्ति को हटाने वाली नहीं है और आगे भी इसे उसी श्रद्धा के साथ अपने घर में रखेगी। जैसे ही यह कहानी सोशल मीडिया पर आई, लोगों के रिएक्शन की बाढ़ आ गई। कुछ यूजर्स ने इसे मासूमियत की मिसाल बताया, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि अब श्रेक भी भगवान बन गया है। कई लोगों ने महिला की सोच की तारीफ करते हुए कहा कि उसने आस्था को मजाक नहीं बनने दिया, बल्कि सकारात्मक नजरिए से देखा।
मूर्ति नहीं, भावना होती है असली पूजा
यह कहानी सिर्फ एक महिला की भूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आस्था और विश्वास को लेकर एक बड़ा संदेश भी देती है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि ईश्वर किसी एक रूप या मूर्ति तक सीमित नहीं होते। अगर किसी इंसान को सच्चे मन से शांति और सुकून मिलता है, तो वही असली पूजा है। एक यूजर ने लिखा कि बौद्ध धर्म ने हमेशा करुणा, सहनशीलता और भीतर की शांति पर जोर दिया है, ऐसे में यह मायने नहीं रखता कि मूर्ति किसकी है। वहीं कुछ लोगों ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि कभी-कभी कार्टून फिल्मों को पहचानना भी जरूरी होता है। इस कहानी ने लोगों को हंसाया भी और सोचने पर भी मजबूर किया कि आस्था का असली अर्थ क्या है। महिला की सादगी और सकारात्मक सोच ने इंटरनेट पर लाखों लोगों का दिल जीत लिया है और यही वजह है कि यह खबर लगातार चर्चा में बनी हुई है।
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