सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वायरल वीडियो तेजी से चर्चा में है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हैं और नाराज भी। यह वीडियो आस्था, परंपरा और इंसानियत के बीच की दूरी को लेकर एक नई बहस छेड़ रहा है। क्लिप में एक व्यक्ति नदी किनारे खड़ा होकर बड़ी मात्रा में दूध नदी में उड़ेलता नजर आता है। बताया जा रहा है कि यह दूध करीब 20 लीटर के आसपास है। वीडियो में यही दृश्य सबसे ज्यादा लोगों को चौंका रहा है, क्योंकि जहां एक ओर व्यक्ति दूध को “चढ़ावे” या “श्रद्धा” के रूप में नदी में बहा रहा है, वहीं दूसरी ओर पास में कुछ बच्चे भी खड़े दिखाई देते हैं। जैसे ही दूध बहना शुरू होता है, बच्चे पास आकर थोड़ा-थोड़ा दूध लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन वीडियो में नजर आता है कि वह व्यक्ति बच्चों को दूध देने की बजाय पूरा दूध नदी में बहाता रहता है।
इस घटना ने लोगों के मन में एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया—अगर सामने जरूरतमंद मौजूद हों, तो क्या श्रद्धा का मतलब चीजों को बहा देना ही रह जाता है? कई लोगों को यह बात चुभ गई कि बच्चों की जरूरत को नजरअंदाज करके दूध बर्बाद किया गया। इसी वजह से यह वायरल वीडियो सिर्फ एक क्लिप नहीं रहा, बल्कि समाज की सोच पर बहस का मुद्दा बन गया।
वीडियो में क्या दिखा: बच्चे मांगते रहे, आदमी दूध बहाता रहा
वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिखाई देता है कि एक व्यक्ति किसी नदी के किनारे खड़ा होकर दूध की बड़ी कैन या बर्तन से लगातार दूध बहा रहा है। आसपास कुछ लोग भी मौजूद हैं जो इस पूरे दृश्य को देख रहे हैं, लेकिन कोई खास रोक-टोक या हस्तक्षेप नजर नहीं आता। वीडियो के बीच में कुछ बच्चे भी दिखाई देते हैं, जो उस दूध की तरफ बढ़ते हैं और हाथ बढ़ाकर थोड़ा दूध लेने की कोशिश करते हैं। कई यूजर्स का कहना है कि बच्चे शायद भूखे थे या उन्हें दूध की जरूरत थी, इसलिए वे उसे लेना चाह रहे थे।
लेकिन जो बात सबसे ज्यादा लोगों को परेशान कर रही है, वह यह है कि व्यक्ति ने बच्चों को दूध देने के बजाय वही दूध नदी में बहा दिया। क्लिप में यह भी दिखता है कि बच्चे बार-बार पास आ रहे हैं, मगर उन्हें दूध नहीं मिलता। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर होने लगा और लोगों ने इस पर अपने-अपने हिसाब से प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। कुछ लोग इसे धार्मिक परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि बहुत से लोग इसे सीधा “बर्बादी और बेरुखी” कह रहे हैं।
यही वजह है कि यह वायरल वीडियो देखते ही देखते लोगों की भावनाओं से जुड़ गया। कई यूजर्स ने कहा कि श्रद्धा का असली मतलब दान, सेवा और जरूरतमंद की मदद होता है, न कि खाने-पीने की चीजें पानी में बहा देना। वीडियो ने लोगों के बीच यह भी चर्चा शुरू करा दी कि अगर किसी को कुछ चढ़ाना ही है, तो जरूरतमंदों को खिलाना भी एक तरह की पूजा हो सकती है।
इस व्यक्ति ने बीसों लीटर दूध व्यर्थ नदी में बहा दिया,
लेकिन बच्चों को नहीं दिया,भारत को पाखंड ने बहुत नुकसान किया है, pic.twitter.com/4cmWxRlIDL
— ANIL (@AnilYadavmedia1) January 22, 2026
सोशल मीडिया पर गुस्सा: “बच्चों को दे देते तो पुण्य मिलता”
इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। कई यूजर्स ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक भावना में इंसानियत को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। कुछ लोगों ने लिखा कि अगर व्यक्ति सच में आस्था के नाम पर कुछ करना चाहता था, तो बच्चों को दूध दे देता तो ज्यादा अच्छा होता। कई प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि दूध बहाकर “पुण्य” नहीं मिलता, बल्कि किसी जरूरतमंद की मदद करके ही असली पुण्य मिलता है।
कुछ यूजर्स ने यह भी लिखा कि यह आस्था नहीं, बल्कि दिखावा और पाखंड है। लोगों का कहना है कि समाज में आज भी बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें खाने के लिए दूध तक नहीं मिलता, ऐसे में दूध का नदी में बहाया जाना दुखद है। एक यूजर ने नाराजगी जताते हुए लिखा कि बच्चों के सामने दूध बहाना इंसानियत के खिलाफ है। वहीं दूसरे ने कहा कि ऐसी सोच देश को पीछे ले जा रही है, क्योंकि जरूरतमंद सामने हो और फिर भी मदद न की जाए, तो यह संवेदनहीनता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
हालांकि कुछ लोग इस पर अलग नजरिया भी रखते हैं। कुछ यूजर्स ने कहा कि यह उस व्यक्ति की निजी आस्था और उसका निजी सामान है, वह चाहे तो उसे जहां चाहे इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर बहस का पलड़ा ज्यादा उन्हीं लोगों की तरफ झुका दिखा, जो इसे गलत मान रहे थे। कुल मिलाकर यह वायरल वीडियो अब सिर्फ एक घटना नहीं रहा, बल्कि लोगों के सोचने के तरीके और समाज की प्राथमिकताओं पर सवाल बन चुका है।
आस्था बनाम इंसानियत: वीडियो ने फिर दिखाया समाज में बढ़ता टकराव
यह वीडियो एक बार फिर यह दिखाता है कि हमारे समाज में आस्था और इंसानियत को लेकर सोच अलग-अलग दिशाओं में जाती हुई नजर आती है। बहुत से लोग मानते हैं कि पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराएं जरूरी हैं, लेकिन जब वही काम किसी जरूरतमंद की मदद रोक दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। इस मामले में भी लोगों की नाराजगी का कारण यही बना कि दूध जैसी जरूरी चीज को नदी में बहा दिया गया, जबकि बच्चों को उससे फायदा मिल सकता था।
विशेषज्ञों और सामाजिक दृष्टि रखने वाले लोगों का मानना है कि श्रद्धा का उद्देश्य लोगों में सकारात्मकता, दया और सेवा भाव बढ़ाना होता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति केवल “चढ़ावे” के नाम पर चीजों को नष्ट करता है और सामने मौजूद जरूरतमंद को नजरअंदाज कर देता है, तो वह श्रद्धा की भावना से दूर चला जाता है। इस वायरल वीडियो के जरिए कई लोगों ने यह संदेश भी दिया कि समाज को यह समझने की जरूरत है कि संसाधनों की कीमत क्या है और जरूरतमंद की मदद कितनी जरूरी है।
अब यह वीडियो लगातार शेयर हो रहा है और लोग इस पर अलग-अलग बहस कर रहे हैं। कुछ लोग इसे चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं कि हमें आस्था निभाते समय यह भी देखना चाहिए कि मानवता कहीं पीछे न छूट जाए। वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत अधिकार का मामला बताकर शांत रहने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन एक बात तय है—यह वायरल वीडियो लोगों के मन में एक कड़वा सवाल छोड़ गया है कि जब मदद करने का मौका सामने हो, तो सिर्फ दिखावे वाली श्रद्धा का क्या मतलब रह जाता है?
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