नवनिर्मित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में हाईवे की दीवारों और फ्लाईओवर के हिस्सों पर एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक स्लोगन लिखे दिखाई दे रहे हैं। कथित तौर पर दीवारों पर लिखा गया था कि “यह रोड मुसलमान के लिए नहीं है।” वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इसे सामाजिक सौहार्द के खिलाफ बताया और कड़ी आपत्ति जताई। इस पूरे मामले में हिंदू रक्षा दल से जुड़े कुछ लोगों ने जिम्मेदारी लेने का दावा किया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में हाईवे के किनारे की दीवारों और फ्लाईओवर के पिलरों पर लिखे गए स्लोगन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। बताया जा रहा है कि यह जगह देहरादून-दिल्ली नेशनल हाईवे के उस हिस्से में आती है, जो एशिया के बड़े कॉरिडोरों में से एक माने जाने वाले राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के पास स्थित है। यह 12 किलोमीटर लंबा हिस्सा पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से भी अहम माना जाता है।
वीडियो वायरल होते ही लोगों ने इसे नफरत फैलाने वाला कृत्य बताया। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक संपत्ति पर इस तरह के संदेश लिखना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी नुकसानदायक है। वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
जिम्मेदारी लेने का दावा और मौके की स्थिति
वायरल वीडियो के बाद मीडिया टीम और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि जिन स्थानों पर आपत्तिजनक शब्द लिखे गए थे, उन्हें बाद में मिटा दिया गया। हालांकि दीवारों पर रंग और पुताई के निशान अब भी देखे जा सकते हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां पहले कुछ लिखा गया था।
हिंदू रक्षा दल से जुड़े कार्यकर्ताओं का दावा है कि उनकी महिला विंग ने यह काम किया। उनका कहना है कि यह कदम उन्होंने अपनी विचारधारा के तहत उठाया। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से किसी संगठन या व्यक्ति के खिलाफ विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह देखा जा रहा है कि किसने और किन परिस्थितियों में यह लेखन किया।
सामाजिक और कानूनी पहलू
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण या भड़काऊ संदेश लिखना कानूनन अपराध की श्रेणी में आ सकता है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना भी दंडनीय है। ऐसे मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई संभव है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है, जिसका उद्देश्य राजधानी और उत्तराखंड के बीच यात्रा को आसान बनाना है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं परियोजना की छवि पर भी असर डाल सकती हैं। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि वह न केवल दोषियों की पहचान करे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी घटना का वीडियो तेजी से फैलता है और समाज में तुरंत प्रतिक्रिया पैदा करता है। ऐसे में जिम्मेदार आचरण और कानून का पालन पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
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