समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। पहले उन्होंने भगवान श्रीराम को ‘समाजवादी’ बताया था और अब उन्होंने बजरंगबली हनुमान को भी ‘PDA भाई’ करार दे दिया है। वीरेंद्र सिंह का कहना है कि हनुमान जी और समाजवादी पार्टी की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) विचारधारा के बीच गहरा मेल है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। समर्थक इसे सामाजिक न्याय की राजनीति से जोड़ रहे हैं, जबकि विरोधी इसे धार्मिक आस्थाओं से राजनीति जोड़ने का आरोप बता रहे हैं। सांसद का दावा है कि हनुमान जी शक्ति, सेवा और समानता के प्रतीक हैं और यही PDA की मूल भावना भी है। इस बयान ने साफ कर दिया है कि आगामी चुनावी माहौल में सपा धार्मिक प्रतीकों को अपने सामाजिक संदेश के साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
मकर संक्रांति, तारीख और ‘मनुवादी सोच’ पर तीखा वार
वीरेंद्र सिंह यहीं नहीं रुके। उन्होंने मकर संक्रांति को लेकर भी बड़ा बयान दिया। एबीपी लाइव से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो लोग मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाते हैं, वे PDA विचारधारा के समर्थक हैं, जबकि 15 जनवरी को त्योहार मनाने वालों को उन्होंने ‘मनुवादी सोच’ से जोड़ दिया। इस बयान ने परंपरा और आस्था के साथ राजनीति को जोड़ने की बहस को और तेज कर दिया। सांसद के अनुसार, त्योहार केवल धार्मिक नहीं होते, बल्कि समाज की सोच और दिशा भी दिखाते हैं। उन्होंने दावा किया कि PDA विचारधारा वंचित, गरीब और शोषित वर्ग की आवाज है और यही वर्ग भारतीय समाज की असली ताकत है। मकर संक्रांति के मौके पर वाराणसी और आसपास के इलाकों में पतंगबाजी के दौरान उन्होंने ‘PDA’ लिखी पतंग उड़ाई और इसी बहाने अपने राजनीतिक संदेश को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना था कि यह पतंग सिर्फ खेल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की उड़ान का प्रतीक है।
पतंग से लेकर BMC चुनाव तक, सपा का बड़ा दावा
मकर संक्रांति के मौके पर की गई यह सियासी पतंगबाजी सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही। वीरेंद्र सिंह ने महाराष्ट्र के BMC चुनावों को लेकर भी बड़ा दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी वहां मजबूती से चुनाव लड़ेगी और PDA विचारधारा को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाएगी। उनके अनुसार, PDA केवल उत्तर प्रदेश की राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकती है। सांसद ने कहा कि जैसे पतंग हवा के साथ ऊंचाई पकड़ती है, वैसे ही PDA की राजनीति भी जनता के समर्थन से आगे बढ़ेगी। इस बयान से साफ है कि सपा अब खुद को क्षेत्रीय दल से आगे बढ़ाकर राष्ट्रीय सामाजिक आंदोलन के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक प्रतीकों और सामाजिक नारों का यह मिश्रण सपा के लिए जोखिम भरा भी हो सकता है।
श्रीराम वाले बयान पर कायम
वीरेंद्र सिंह अपने श्रीराम वाले बयान से भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने दोहराया कि बीजेपी केवल ‘राजा राम’ की उपासक है, जबकि समाजवादी पार्टी ‘गरीब, शोषित और वंचित राम’ की बात करती है। उनके मुताबिक, भगवान राम ने वनवास के दौरान इन्हीं वर्गों के साथ मिलकर रावण पर विजय पाई थी। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। प्रसिद्ध कथावाचक रामभद्राचार्य ने सपा पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि अगर श्रीराम समाजवादी थे तो मुलायम सिंह यादव के शासन में अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियां क्यों चलीं। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव और भगवान राम की तुलना असंभव है। वहीं, सपा सांसद के बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में धर्म, समाज और राजनीति का यह संगम और ज्यादा विवादों को जन्म दे सकता है। फिलहाल, श्रीराम के बाद हनुमान को ‘PDA भाई’ बताने वाला यह बयान सियासी गलियारों में गर्म मुद्दा बना हुआ है।
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