बिहार की राजनीति में इस समय गृह विभाग को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। लगभग 20 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि यह अहम मंत्रालय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बजाय किसी और को सौंपा गया है। नई सरकार में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को गृह विभाग की जिम्मेदारी दी गई है और उन्होंने 22 नवंबर को आधिकारिक तौर पर पदभार ग्रहण भी कर लिया। इस फैसले के बाद सियासी प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। आरएलएम के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से जब गृह मंत्रालय के परिवर्तन पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि विभागों का बंटवारा मुख्यमंत्री का अधिकार होता है और इसमें किसी को असहज महसूस करने की जरूरत नहीं है।
बेटे दीपक को मंत्री बनाए जाने पर भी बोले कुशवाहा
इस बदलाव के बीच एक और चर्चा सामने आई। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक कुमार कुशवाहा को मंत्री बनाए जाने की। पटना के गांधी मैदान में शपथ लेने के बाद दीपक अचानक सुर्खियों में आ गए, क्योंकि वे अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। विपक्ष ने इस नियुक्ति को लेकर परिवारवाद का आरोप लगाया, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने इसे युवा नेतृत्व को मौका देने का निर्णय बताया।
उन्होंने कहा कि दीपक पढ़ा-लिखा युवा है और जनता की सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने भरोसा जताया कि दीपक मेहनत से काम करके लोगों की उम्मीदों को पूरा करेगा और अपने विभाग में अच्छा प्रदर्शन दिखाएगा।
‘वोट चोरी’ मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया
इस बीच कांग्रेस द्वारा उठाए गए ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर भी उपेंद्र कुशवाहा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह एक बेबुनियाद विषय है जिसे राजनीतिक लाभ के लिए हवा दी जा रही है। कुशवाहा का कहना था कि अगर वास्तव में वोट चोरी हुई होती, तो जनता सड़कों पर उतर आती और इसके पुख्ता प्रमाण भी सामने आते, लेकिन ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि देश और राज्य के सामने कई अहम मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा और काम करने की जरूरत है। ऐसे में कांग्रेस को फालतू विवादों की बजाय वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, ताकि राजनीति का स्तर सुधरे और जनता को लाभ मिले।
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