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अंदरखाने की खामोशी टूटी! शशि थरूर ने अचानक राहुल गांधी को लेकर कह दी इतनी बड़ी बात

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी को सांप्रदायिकता के खिलाफ देश की सबसे मजबूत आवाज बताया। पार्टी में मतभेद की अटकलों पर विराम लगाते हुए उन्होंने एकता, केरल चुनाव और भविष्य की रणनीति पर खुलकर बात की।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की जमकर तारीफ कर सियासी गलियारों में चल रही तमाम अटकलों पर ब्रेक लगा दिया है। लंबे समय से यह चर्चा थी कि थरूर और कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व के बीच रिश्ते सहज नहीं हैं, लेकिन दिल्ली में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद थरूर ने खुद सामने आकर स्थिति साफ कर दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश में सांप्रदायिकता के खिलाफ एक मुखर, ईमानदार और मजबूत आवाज हैं। थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि वे कांग्रेस पार्टी को छोड़ने का कोई विचार नहीं रखते और पार्टी के भीतर रहकर ही लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई लड़ते रहेंगे। उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर एकता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब विपक्षी दल लगातार कांग्रेस में अंदरूनी कलह का दावा करते रहे हैं।

‘मेरे दो नेता हैं’, खरगे और राहुल को बताया मार्गदर्शक

शशि थरूर ने अपने बयान में पार्टी नेतृत्व को लेकर भी पूरी स्पष्टता दिखाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में उनके दो नेता हैं—पहले पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और दूसरे संसद में नेता विपक्ष राहुल गांधी। थरूर ने कहा कि पार्टी के भीतर सभी सहकर्मी मिलकर काम कर रहे हैं और सभी का उद्देश्य देश के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों का सामना करना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस में मतभेदों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि पार्टी में सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक चर्चा का माहौल है। कोच्चि महापंचायत के बाद उठे विवादों को भी थरूर ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी और कहा कि राजनीतिक दलों में विचार-विमर्श स्वाभाविक है, लेकिन इससे पार्टी की एकता पर कोई असर नहीं पड़ता। उनके इस बयान को राहुल गांधी के नेतृत्व पर भरोसे और संगठनात्मक मजबूती के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

केरल चुनाव से पहले एकता का बड़ा संदेश

केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शशि थरूर का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ, मुख्यमंत्री पी. विजयन की अगुवाई वाली एलडीएफ सरकार को सत्ता से हटाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। थरूर ने कहा कि वे केरल के सभी 140 विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक रूप से प्रचार करने की योजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले कई चुनावों में वे 56 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार कर चुके हैं और इस बार यह संख्या और बढ़ सकती है। थरूर ने जोर देकर कहा कि चुनाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं होता, बल्कि मतदाताओं तक सही और सकारात्मक संदेश पहुंचाना सबसे जरूरी होता है। उनके मुताबिक, कांग्रेस को लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रुख के साथ जनता के बीच जाना होगा।

सांप्रदायिकता के खिलाफ आवाज और भविष्य की रणनीति

राहुल गांधी को लेकर शशि थरूर ने कहा कि आज के दौर में जब समाज को बांटने की कोशिशें तेज हैं, तब राहुल गांधी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने राहुल गांधी को सांप्रदायिकता के खिलाफ देश की एक मजबूत और भरोसेमंद आवाज बताया। थरूर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर सभी नेता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और आने वाले समय में कांग्रेस एकजुट होकर जनता के सामने अपना पक्ष रखेगी। थरूर का यह बयान न सिर्फ राहुल गांधी के नेतृत्व को मजबूती देता है, बल्कि केरल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कांग्रेस की रणनीति को लेकर भी एक साफ संदेश देता है कि पार्टी अंदरूनी मतभेदों से ऊपर उठकर साझा लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।

 

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