Monday, February 2, 2026
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“मैं नेहरू का अंधभक्त नहीं…” शशि थरूर ने 1962 की हार से लेकर लोकतंत्र तक खोल दी पूरी परत

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जवाहरलाल नेहरू पर खुलकर बात करते हुए कहा कि वह उनके अंधभक्त नहीं हैं। 1962 की चीन से हार, लोकतंत्र की नींव और बीजेपी के नेहरू विरोध पर क्या बोले थरूर, पढ़ें पूरी खबर।

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कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लेकर एक बार फिर खुलकर अपनी राय रखी है। केरल लेजिस्लेटिव असेंबली इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल के मंच से बोलते हुए थरूर ने साफ कहा कि वह नेहरू के प्रशंसक हैं, लेकिन अंधभक्त नहीं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नेहरू से कुछ गंभीर गलतियां हुईं, लेकिन हर समस्या के लिए केवल उन्हें ही दोषी ठहराना सही नहीं है। थरूर ने कहा कि नेहरू की सोच, उनका वैश्विक दृष्टिकोण और लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता भारतीय राजनीति की मजबूत नींव बनी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति को समझने के लिए उसके पूरे दौर, परिस्थितियों और चुनौतियों को देखना जरूरी होता है, न कि केवल कुछ घटनाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालना।

लोकतंत्र की नींव और नेहरू का योगदान

शशि थरूर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में लोकतंत्र की मजबूत स्थापना का श्रेय जवाहरलाल नेहरू को जाता है। उन्होंने कहा कि आज देश में चुनाव, संसद, स्वतंत्र न्यायपालिका और अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसी व्यवस्थाएं जिस मजबूती से खड़ी हैं, उसकी बुनियाद नेहरू के समय में रखी गई थी। थरूर के अनुसार, आजादी के बाद भारत के सामने कई रास्ते थे, लेकिन नेहरू ने लोकतांत्रिक मूल्यों को चुना। उन्होंने यह भी कहा कि नेहरू ने वैज्ञानिक सोच, शिक्षा, संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। थरूर ने स्पष्ट किया कि किसी भी नेता की आलोचना हो सकती है, लेकिन उनके सकारात्मक योगदान को नजरअंदाज करना न तो न्यायसंगत है और न ही ईमानदार विश्लेषण।

1962 की हार पर थरूर की साफ राय

1962 में चीन के साथ हुई जंग और भारत की हार को लेकर शशि थरूर ने संतुलित लेकिन स्पष्ट टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में हुई हार के लिए नेहरू के कुछ फैसलों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। थरूर ने माना कि उस समय चीन को लेकर भारत की रणनीति और आकलन में गंभीर चूक हुई। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उस दौर की अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां, सीमित सैन्य संसाधन और नई-नई आजादी के बाद की चुनौतियों को भी समझना होगा। थरूर ने कहा कि आलोचना करना जरूरी है, लेकिन इतिहास को केवल दोषारोपण के चश्मे से देखना गलत है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि आज की राजनीति में 1962 की हार को बार-बार उठाकर नेहरू को हर मुद्दे का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जो एकतरफा सोच को दर्शाता है।

बीजेपी पर निशाना और नेहरू को ‘बलि का बकरा’ बनाने का आरोप

शशि थरूर ने अपने बयान में मौजूदा बीजेपी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह यह नहीं कहते कि बीजेपी लोकतंत्र विरोधी है, लेकिन यह जरूर है कि बीजेपी नेहरू विरोधी है। थरूर के अनुसार, आज हर राजनीतिक, आर्थिक या सामाजिक समस्या के लिए नेहरू को दोषी ठहराने की प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में आलोचना समझ में आती है, लेकिन हर मुद्दे को नेहरू से जोड़ देना राजनीति से प्रेरित है। थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि नेहरू अब एक तरह से “बलि का बकरा” बना दिए गए हैं। उन्होंने अपील की कि देश को आगे बढ़ाने के लिए अतीत की गलतियों से सीख ली जाए, लेकिन इतिहास को तोड़-मरोड़कर राजनीतिक हथियार न बनाया जाए।

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