कांग्रेस सांसद शशि थरूर आखिरकार लंबे समय बाद पार्टी की एक अहम बैठक में नजर आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर फिर तेज हो गया है। तिरुवनंतपुरम में आयोजित कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में जब थरूर पहुंचे, तो वह मुस्कराते हुए हाथ हिलाते और तेजी से कदम बढ़ाते दिखे। उनकी यह मौजूदगी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि बीते कुछ महीनों से वे लगातार कांग्रेस की बैठकों से दूरी बनाए हुए थे। कई मौकों पर थरूर की गैरहाजिरी ने यह सवाल खड़े कर दिए थे कि क्या वे पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं या फिर कांग्रेस के भीतर उनकी भूमिका को लेकर कुछ असहजता है। ऐसे माहौल में उनका अचानक बैठक में शामिल होना सियासी संकेतों से भरपूर माना जा रहा है।
कई बैठकों में शामिल नहीं हुए थे शशि थरूर
शशि थरूर पिछले कुछ समय से कांग्रेस की कई महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल नहीं हुए थे। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले हुई रणनीतिक बैठक में उनकी गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर कई सवाल खड़े किए। इसके बाद 18 नवंबर को हुई एक और अहम बैठक में भी थरूर नजर नहीं आए। यहां तक कि संसद सत्र के दौरान राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई कांग्रेस लोकसभा सांसदों की बैठक में भी उनकी गैरहाजिरी चर्चा का विषय बनी रही। इसी दौरान थरूर के कुछ बयान ऐसे भी आए, जिनमें उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और कामकाज की खुले तौर पर तारीफ की थी। इन बयानों को लेकर यह कयास लगाए जाने लगे थे कि थरूर पार्टी लाइन से अलग सोच रखने लगे हैं और शायद कांग्रेस नेतृत्व से उनकी दूरी बढ़ रही है।
नाराजगी की अटकलों के बीच बैठक में एंट्री
लगातार गैरहाजिरी और बयानबाजी के चलते कांग्रेस के भीतर और बाहर यह चर्चा तेज हो गई थी कि शशि थरूर पार्टी से नाराज चल रहे हैं। कुछ लोगों का मानना था कि नेतृत्व की शैली या संगठनात्मक फैसलों से वे असहमत हैं, जबकि कुछ इसे उनकी स्वतंत्र सोच और अंतरराष्ट्रीय अनुभव से जोड़कर देख रहे थे। ऐसे में कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में उनका अचानक पहुंचना कई अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि उनकी मौजूदगी के बावजूद पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य हो गया है, ऐसा मान लेना जल्दबाजी होगी। थरूर की भूमिका, उनके विचार और नेतृत्व के साथ उनके संबंध आने वाले समय में कांग्रेस की राजनीति को किस दिशा में ले जाएंगे, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।
कांग्रेस के लिए क्या मायने रखती है थरूर की वापसी?
शशि थरूर न सिर्फ एक वरिष्ठ सांसद हैं, बल्कि उनकी पहचान एक वैश्विक सोच रखने वाले नेता के तौर पर भी है। ऐसे में पार्टी बैठकों में उनकी सक्रिय मौजूदगी कांग्रेस के लिए अहम मानी जाती है। तिरुवनंतपुरम की बैठक में उनकी भागीदारी से यह संदेश जरूर गया है कि वे पूरी तरह से कांग्रेस से कटे नहीं हैं। हालांकि, यह भी साफ है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग विचारधाराओं और सोच को लेकर मंथन जारी है। थरूर की वापसी को कुछ लोग कांग्रेस में संवाद की बहाली के संकेत के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे केवल औपचारिक उपस्थिति मान रहे हैं। फिलहाल, उनकी मुस्कराहट और मौजूदगी ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और भी सियासी संकेत सामने आ सकते हैं।
