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पाकिस्तान कैसे चौधरी बन रहा है…सर्वदलीय बैठक के बाद संजय सिंह ने सरकार पर खड़े किए सवाल

ईरान संकट पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में संजय सिंह ने सरकार से तीखे सवाल पूछे। गैस-पेट्रोल की कमी, पाकिस्तान की भूमिका और सरकार के जवाब ने बढ़ाई चर्चा।

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस अहम बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी बैठक का हिस्सा रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा, विदेश नीति और मौजूदा हालात पर राजनीतिक दलों को भरोसे में लेना था। सरकार ने इस दौरान विपक्ष को आश्वस्त करने की कोशिश की कि हालात पर पूरी नजर रखी जा रही है।

गैस-पेट्रोल को लेकर जनता में डर, संजय सिंह ने उठाए सवाल

बैठक के बाद संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस समय देश में आम लोगों के बीच चिंता का माहौल है। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर गैस सिलेंडर और पेट्रोल पंपों पर भीड़ देखी जा रही है, जिससे पैनिक जैसी स्थिति बन रही है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री के हालिया भाषणों के बाद भी लोगों की चिंता कम नहीं हुई है। उन्होंने साफ कहा कि अगर जनता को परेशानी होती है तो विपक्ष आवाज उठाता रहेगा और इसे सहयोग की कमी नहीं समझा जाना चाहिए।

सरकार का दावा- नहीं होगी तेल और गैस की कमी

संजय सिंह के मुताबिक, बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में फिलहाल तेल और गैस की कोई कमी नहीं है। सरकार ने बताया कि भारत करीब 60 फीसदी एलपीजी का उत्पादन खुद करता है और बाकी जरूरतों के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। अधिकारियों ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है और सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है। हालांकि, विपक्ष ने इस दावे की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाए और कहा कि आने वाले दिनों में स्थिति साफ हो जाएगी।

पाकिस्तान की भूमिका पर उठा विवाद, सरकार ने दिया जवाब

बैठक में सबसे दिलचस्प मुद्दा पाकिस्तान की भूमिका को लेकर रहा। संजय सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर इस पूरे मामले में पाकिस्तान कैसे मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि 1981 से अमेरिका पाकिस्तान को ईरान के साथ बातचीत में शामिल करता रहा है। सरकार ने इसे एक पुरानी कूटनीतिक प्रक्रिया बताया, लेकिन इस पर सियासी बहस तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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