लालू प्रसाद यादव की बेटी और तेजस्वी यादव की बहन रोहिणी आचार्य एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। सोमवार दोपहर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिर्फ एक वाक्य लिखा और उसके बाद बिहार की राजनीति में तरह-तरह के कयास लगने लगे। रोहिणी ने लिखा, “जिस्मानी जख्म से भी दर्द होता है, मगर चोट जब दिल पर लगती है दर्द बेइंतहा होता है…”। यह पोस्ट न सिर्फ भावनाओं से भरी हुई थी, बल्कि इसके पीछे छिपे इशारों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, किसी घटना का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनके शब्दों ने यह साफ कर दिया कि यह दर्द किसी बाहरी से नहीं, बल्कि बेहद करीबी रिश्तों से जुड़ा है। पिछले कुछ महीनों से रोहिणी लगातार अपने भाई तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को लेकर नाराजगी जताती रही हैं। ऐसे में उनका यह भावुक पोस्ट एक बार फिर पारिवारिक रिश्तों में चल रही कथित खटास की ओर इशारा करता नजर आया।
चुनावी हार के बाद टूटा भरोसा, परिवार और पार्टी से बनाई दूरी
बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की हार के बाद से ही रोहिणी आचार्य का रुख पूरी तरह बदला हुआ दिख रहा है। पहले जहां वे पार्टी और परिवार के पक्ष में खुलकर बोलती थीं, वहीं अब उनके पोस्टों में नाराजगी और पीड़ा साफ झलकती है। रोहिणी ने चुनावी नतीजों के बाद तेजस्वी यादव को हार का जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि गलत फैसलों की वजह से पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ। इसके बाद उन्होंने खुद को राजद और अपने परिवार से अलग कर लिया। रोहिणी का आरोप रहा है कि पार्टी के भीतर कुछ लोगों ने सच्चाई को दबाने की कोशिश की और सवाल उठाने वालों को बदनाम किया गया। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर कुछ नामों का जिक्र किया जाए, तो घर से निकालने तक की नौबत आ जाती है। उनके इन बयानों ने उस वक्त भी काफी विवाद खड़ा किया था। अब उनके नए पोस्ट को उसी टूटे हुए भरोसे और गहरे जख्म से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसने उन्हें अपने ही परिवार और पार्टी से दूर कर दिया।
जिस्मानी जख्म से भी दर्द होता है , मगर चोट जब दिल पर लगती है दर्द बेइंतेहा होता है …
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) February 2, 2026
तेजस्वी पर सीधे हमले, नेतृत्व और सलाहकारों पर उठाए सवाल
रोहिणी आचार्य सिर्फ भावुक पोस्ट तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने कई मौकों पर तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए हैं। हाल ही में जब तेजस्वी यादव को राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया, तब भी रोहिणी ने खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने एक्स पर लिखा था कि लालू प्रसाद यादव और पार्टी के लिए किसने कितना काम किया, यह लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजों से साफ हो जाता है। उन्होंने इशारों में तेजस्वी के करीबी सलाहकारों और तथाकथित “आयातित गुरुओं” पर भी निशाना साधा था। रोहिणी का कहना था कि गलत सलाह और गलत लोगों की वजह से पार्टी को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया गया। उन्होंने यह भी लिखा था कि अगर नैतिक साहस है तो खुले मंच पर सवालों का सामना किया जाना चाहिए। उनके इन बयानों से यह साफ हो गया था कि यह सिर्फ भाई-बहन का मतभेद नहीं, बल्कि पार्टी की दिशा और नेतृत्व को लेकर गहरी असहमति है।
रोहिणी के दर्द से क्या बदलेगा सियासी समीकरण
रोहिणी आचार्य का ताजा पोस्ट एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या यह सिर्फ निजी दर्द की अभिव्यक्ति है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है। उनके शब्दों में भावनाओं की गहराई साफ महसूस होती है, लेकिन बिहार की राजनीति में हर भावुक बयान को सियासी नजर से देखा जाता है। रोहिणी के लगातार हमलों से यह धारणा मजबूत हो रही है कि लालू परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। इससे विपक्ष को भी राजद पर हमला करने का मौका मिल रहा है। वहीं, पार्टी के समर्थक इस पूरे मामले को निजी पारिवारिक विवाद बताकर नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, रोहिणी जिस तरह बार-बार सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रख रही हैं, उससे यह साफ है कि उनके दिल पर लगी चोट अब सिर्फ निजी नहीं रही। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रोहिणी अपने आरोपों को और खुलकर सामने रखेंगी या यह भावुक पोस्ट सिर्फ उनके मन का बोझ हल्का करने की कोशिश भर था। इतना तय है कि उनके एक वाक्य ने बिहार की सियासत में फिर से बेचैनी बढ़ा दी है।
