हरियाणा की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब जननायक जनता पार्टी (JJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला का एक बयान सार्वजनिक हुआ। महेंद्रगढ़ जिले में आयोजित एक बड़े युवा सम्मेलन के दौरान उन्होंने सत्ता और शासकों को लेकर बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बहस छिड़ गई। समर्थक इसे जनता के गुस्से की आवाज बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ करार दे रहे हैं।
महेंद्रगढ़ के मंच से उठी सियासी चिंगारी
महेंद्रगढ़ में आयोजित युवा योद्धा सम्मेलन में अजय चौटाला ने युवाओं को संबोधित करते हुए मौजूदा शासन व्यवस्था पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में हालात ऐसे बन चुके हैं कि अब केवल भाषण और मांगों से बदलाव संभव नहीं है। चौटाला ने अपने भाषण में यह कहा कि शासकों को सत्ता की कुर्सी से हटाने के लिए जनता को सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
उनके इस बयान के बाद सभा में मौजूद युवाओं में जोश देखा गया, लेकिन भाषण की भाषा ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया। अजय चौटाला ने उदाहरण देते हुए कहा कि पड़ोसी देशों में युवाओं ने संगठित होकर बड़े आंदोलन खड़े किए और सरकारों को झुकने पर मजबूर किया। उन्होंने संकेत दिया कि भारत में भी जनता को एकजुट होकर अपनी ताकत दिखानी होगी।
पड़ोसी देशों के आंदोलनों का जिक्र बना विवाद की वजह
अपने भाषण के दौरान अजय चौटाला ने नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका का नाम लेते हुए वहां हुए जन आंदोलनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन देशों में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सत्ता परिवर्तन कर दिया और शासकों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। चौटाला के मुताबिक, जब जनता संगठित होती है, तो कोई भी सत्ता टिक नहीं सकती।
यही हिस्सा उनके बयान का सबसे ज्यादा विवादित बन गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस तरह की बातें हिंसा और अराजकता को बढ़ावा दे सकती हैं। वहीं, जेजेपी नेताओं का कहना है कि अजय चौटाला का इरादा हिंसा भड़काने का नहीं था, बल्कि वह लोकतांत्रिक दबाव और जन आंदोलन की बात कर रहे थे। पार्टी का दावा है कि बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
चौटाला परिवार, युवाओं की नाराजगी और सियासी संदेश
अजय चौटाला हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के बेटे और पूर्व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पिता हैं। चौटाला परिवार का हरियाणा की राजनीति में लंबा इतिहास रहा है। जेजेपी खुद को युवाओं, किसानों और ग्रामीण मतदाताओं की आवाज बताती रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई और सरकारी भर्तियों को लेकर युवाओं में नाराजगी बढ़ी हुई है। अजय चौटाला का यह बयान इसी असंतोष को भुनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस तरह की बयानबाजी जेजेपी को राजनीतिक फायदा दिलाएगी या पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस बयान पर प्रशासन और चुनाव आयोग की क्या प्रतिक्रिया होती है।
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