ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भारत की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका और इजरायल के हमले को अमानवीय और गैरकानूनी बताया है। एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि खामेनेई शिया मुसलमानों के सर्वोच्च धार्मिक नेता थे और इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्र में शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती। असदुद्दीन ओवैसी ने मांग की कि भारत सरकार को इस घटना की स्पष्ट शब्दों में निंदा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रमजान के पवित्र महीने में किया गया हमला पूरी तरह अनैतिक है और इससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ेगा।
प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा पर उठाए सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा पर भी सवाल उठाए। उन्हों ने कहा कि 25-26 फरवरी को हुई यात्रा के दौरान भारत और इजरायल के बीच रक्षा और व्यापार से जुड़े कई समझौते हुए। इसके ठीक दो दिन बाद 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमला कर दिया। ओवैसी ने पूछा कि यदि हालात इतने तनावपूर्ण थे तो क्या भारत को पहले से जानकारी थी? अगर जानकारी थी तो यात्रा टालनी चाहिए थी, और अगर नहीं थी तो यह कूटनीतिक चूक है। उन्होंने कहा कि भारत की दशकों पुरानी संतुलित विदेश नीति अब खतरे में दिख रही है और ऐसा लगता है कि हमने एक पक्ष चुन लिया है।
भारतीय नागरिकों और अर्थव्यवस्था पर असर की चिंता
असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरे घटनाक्रम के भारत पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जो अपने परिवारों को पैसा भेजते हैं। अगर युद्ध बढ़ता है तो उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पहले ही प्रभावित हो चुकी हैं और कई लोग फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की तैयारी रखनी चाहिए। विदेश मंत्रालय की ओर से नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि इससे ज्यादा ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, भारत के सामने चुनौती
अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी कदम उठाने के संकेत दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी नेतृत्व की रणनीति को लेकर दुनिया भर में बहस छिड़ी हुई है। भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि उसे अपने कूटनीतिक संबंधों और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को शांति और संवाद का समर्थन करते हुए तटस्थ रुख बनाए रखना चाहिए। फिलहाल देश में राजनीतिक बयानबाजी तेज है और आम लोग यह जानना चाहते हैं कि इस संकट में भारत की अगली रणनीति क्या होगी।

