बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है और सबकी नजरें नई सरकार के गठन पर टिकी हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, निशांत फिलहाल नई सरकार में डिप्टी सीएम बनने के इच्छुक नहीं हैं। यह खबर इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय से उन्हें सक्रिय राजनीति में बड़ी भूमिका मिलने की चर्चा थी। लेकिन अब उनका यह रुख कई सवाल खड़े कर रहा है—क्या यह सिर्फ निजी फैसला है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है?
संगठन पर फोकस करना चाहते हैं निशांत
बताया जा रहा है कि निशांत कुमार सरकार में शामिल होने के बजाय संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहते हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, वे जमीनी स्तर पर काम करके अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। हालांकि, जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि निशांत सरकार में शामिल होकर बड़ी जिम्मेदारी संभालें। इसको लेकर लगातार बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
CM पद को लेकर भी तेज हुई अटकलें
बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर भी सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। जहां बीजेपी अपने नेता को पहली बार सीएम बनाने की तैयारी में दिख रही है, वहीं जेडीयू के भीतर कुछ नेता निशांत कुमार को आगे लाने की वकालत कर रहे हैं। हालांकि, ताजा संकेत यही हैं कि निशांत फिलहाल किसी भी सरकारी पद से दूरी बनाकर चलना चाहते हैं। इस स्थिति ने सियासी समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है।
बैठकों के बाद साफ होगी तस्वीर
सूत्रों के मुताबिक, 14 अप्रैल को जेडीयू और बीजेपी दोनों अपने-अपने विधायकों के साथ अहम बैठकें करेंगी। इसके बाद एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। माना जा रहा है कि इन बैठकों के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि नई सरकार में किसे क्या जिम्मेदारी मिलेगी और निशांत कुमार की भूमिका क्या होगी।
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