जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में एक बयान देकर राजनीतिक बहस को फिर से तेज कर दिया है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर का जिक्र किया और इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में पाकिस्तान का नाम लेना अक्सर राजनीतिक विवाद का कारण बन जाता है। मुफ्ती ने कहा कि कुछ लोगों को पाकिस्तान का नाम लेना भी असहज कर देता है, लेकिन अगर शांति की दिशा में कोई प्रयास होता है, तो उसे स्वीकार करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।
“सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए” – मुफ्ती का तर्क
महबूबा मुफ्ती ने अपने भाषण में कहा कि हालिया तनाव के दौरान पाकिस्तान ने कुछ ऐसे कदम उठाए, जिनकी वजह से स्थिति को संभालने में मदद मिली और संघर्ष बढ़ने से रोका जा सका। उन्होंने कहा कि भले ही कुछ लोग इसे स्वीकार न करना चाहें, लेकिन सच्चाई यही है कि पाकिस्तान ने एक बड़े टकराव को टालने में भूमिका निभाई। मुफ्ती ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब हालात बिगड़ते हैं, तब संवाद और संयम ही एकमात्र रास्ता होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक शांति के लिए सभी देशों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए और टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
पिता की सोच का हवाला, बातचीत पर जोर
अपने बयान के दौरान मुफ्ती ने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री Mufti Mohammad Sayeed की सोच को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा यह मानते थे कि किसी भी विवाद का हल बातचीत और सुलह से ही निकल सकता है। मुफ्ती ने कहा कि आज के हालात में भी उसी रास्ते पर चलने की जरूरत है, क्योंकि हिंसा और टकराव से सिर्फ नुकसान ही होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शांति बनाए रखें और धैर्य के साथ हालात का सामना करें। उनके अनुसार, अगर सभी पक्ष संयम बरतें, तो लंबे समय तक स्थिरता हासिल की जा सकती है।
कश्मीर के हालात और धार्मिक मुद्दों पर चिंता
महबूबा मुफ्ती ने अपने भाषण में कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यहां के लोग अभी भी डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने कुछ हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर कई सवाल हैं, जिन्हें संवेदनशील तरीके से सुलझाने की जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने धार्मिक मुद्दों को भी उठाया और कहा कि जहां एक ओर Al-Aqsa Mosque को लंबे समय बाद खोला गया है, वहीं श्रीनगर की जामिया मस्जिद का बंद रहना चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों में लोगों की भावनाओं का ध्यान रखा जाए। अपने संबोधन के अंत में मुफ्ती ने उम्मीद जताई कि अंततः सच्चाई और न्याय की जीत होगी और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सकेगी।
