उत्तर प्रदेश के ज़ेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के उद्घाटन के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ संकेत दिए कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आई, तो पश्चिमी यूपी को अलग प्रदेश बनाने की कवायद फिर से शुरू हो सकती है। मायावती ने नोएडा एयरपोर्ट के निर्माण में देरी के लिए सपा और केंद्र में रही कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यदि ये सरकारें रोड़ा नहीं डालतीं तो यह कार्य पहले ही उनकी सरकार में पूरा हो जाता।
मायावती ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि बीएसपी की उनकी सरकार के दौरान ज़ेवर एयरपोर्ट की रूपरेखा और बुनियादी काम शुरू हो गए थे। उन्होंने सपा सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने बसपा द्वारा किए गए विकास और कमजोर वर्गों के कल्याण के कामों को निष्क्रिय किया। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और यूपी के बंटवारे की संभावना पर नए कयास तेज कर दिए हैं।
पश्चिमी यूपी के अलग प्रदेश का सपना
मायावती ने यह भी कहा कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है, तो पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की अलग बेंच और अलग प्रदेश बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। बीते सालों में मायावती उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की योजना लेकर चली थीं। साल 2011 में उनकी सरकार ने इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, लेकिन केंद्र से मंजूरी न मिलने के कारण मामला स्थगित रह गया। अब मायावती के बयान से यह साफ हो गया है कि अगर उनकी सरकार बनती है, तो इस मुद्दे को पुनः उठाया जाएगा।
यह ऐलान राजनीतिक दाव-पेंच में और भी गरमाहट ला सकता है। मायावती ने जनता से अपील की है कि वे विरोधी पार्टियों की राजनीति और झूठे वादों में बहक कर निर्णय न लें। उन्होंने कहा कि बसपा की नीति ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ पर भरोसा करना चाहिए और अपने क्षेत्र और राज्य के विकास के लिए बीएसपी के नेतृत्व पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया
मायावती के इस बयान के बाद यूपी की सियासी तस्वीर में हलचल बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के नेता भी इस मुद्दे पर बयानबाजी कर रहे हैं। बीते दिनों कुछ भाजपा नेताओं ने भी अलग प्रदेश की मांग उठाई थी। अमेठी में संजय सिंह और मुजफ्फरनगर में संजीव बालियान ने अलग प्रदेश बनाने की जरूरत जताई थी। अब मायावती का बयान इस चर्चा को और नया आयाम दे रहा है। मायावती का यह ऐलान आगामी चुनावों में यूपी की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। पश्चिमी यूपी में अलग प्रदेश बनाने के मुद्दे पर बहस तेज होगी और राजनीतिक पार्टियों के बीच चुनावी रणनीतियों में बदलाव आ सकता है। मायावती का दावा राजनीतिक सस्पेंस और हलचल दोनों पैदा कर रहा है।
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