मंगलवार को पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने राज्य सचिवालय नबान्न पहुंचे। यह मुलाकात करीब 40 मिनट तक बंद कमरे में चली, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है। अखिलेश यादव के साथ उनकी पत्नी और लोकसभा सांसद डिंपल यादव भी मौजूद थीं। माना जा रहा है कि यह सिर्फ औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि आने वाले राजनीतिक हालात और विपक्ष की भूमिका को लेकर गंभीर चर्चा हुई। जिस तरह से यह बैठक बिना किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के हुई, उससे साफ है कि दोनों नेताओं के बीच रणनीति को लेकर बातचीत हुई है। देश में विपक्षी दलों के बीच एकजुटता की कोशिशों के बीच यह मुलाकात काफी मायने रखती है।
बीजेपी पर हमला, ममता को बताया मजबूत नेता
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने खुलकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में समाजवादी पार्टी ममता बनर्जी के साथ खड़ी है। अखिलेश ने यह भी कहा कि देश में बीजेपी के खिलाफ मजबूती से खड़े होने की हिम्मत अगर किसी में है, तो वह सिर्फ ममता बनर्जी में है। उनके इस बयान को विपक्षी राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है। इससे यह साफ हुआ कि विपक्ष बीजेपी के खिलाफ एक साथ आने की कोशिश कर रहा है। अखिलेश के बयान से यह भी संकेत मिला कि आने वाले समय में विपक्षी दल मिलकर साझा रणनीति बना सकते हैं, खासकर चुनाव से पहले।
SIR और NRC को लेकर उठाए गंभीर सवाल
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की आड़ में एनआरसी लागू करने की कोशिश की जा रही है। अखिलेश के मुताबिक, इस प्रक्रिया से आम लोगों को परेशान किया जा रहा है और उन्हें डराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने की आशंका से जनता में डर का माहौल बन रहा है। अखिलेश ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब ममता बनर्जी पहले ही SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा चुकी हैं। ममता ने इस प्रक्रिया को “बड़ा घोटाला” बताया है और इसे तुरंत रोकने की मांग की है।
दिल्ली तक जाएगा मामला, राजभर ने ली चुटकी
ममता बनर्जी अब SIR के मुद्दे को बंगाल से बाहर राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी में हैं। चर्चा है कि वह जल्द ही दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर के सामने धरना-प्रदर्शन कर सकती हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का खुला समर्थन विपक्ष की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है। वहीं दूसरी ओर, इस मुलाकात को लेकर सत्तापक्ष ने भी तंज कसा है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने अखिलेश यादव पर चुटकी लेते हुए कहा कि जहां-जहां अखिलेश जाते हैं, वहां बीजेपी की सरकार बन जाती है। उन्होंने कहा कि अखिलेश दिखावे की राजनीति करते हैं। हालांकि इन बयानों के बावजूद ममता और अखिलेश की मुलाकात यह साफ संकेत दे रही है कि बीजेपी के खिलाफ विपक्ष धीरे-धीरे एकजुट होने की कोशिश कर रहा है और आने वाले समय में राजनीति और ज्यादा गर्म हो सकती है।
