उत्तर प्रदेश में UGC के नए नियमों को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर विवाद तेज हो गया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र और वर्तमान सांसद करण भूषण उस समिति के सदस्य थे जिसने ये नियम बनाए हैं। इस दावे के बाद जनता और मीडिया में चर्चा का विषय बन गया। लोग सवाल कर रहे थे कि क्या करण भूषण और उनके छोटे भाई प्रतीक भूषण के बीच इस मुद्दे को लेकर मतभेद हैं। सोशल मीडिया पर कई समाचार चैनलों और प्लेटफॉर्म पर बिना जांच के खबरें और पोस्ट वायरल हो रही थीं, जिससे भ्रांतियों का माहौल बन गया।
करण भूषण का स्पष्ट खंडन
इस पूरे मामले पर सांसद करण भूषण ने खुद सामने आकर बयान जारी किया। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने UGC के नियम बनाने वाली कमेटी में कभी काम नहीं किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से मेरे विरुद्ध कई तरह की गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा, “बिना मेरे पक्ष जाने ऐसा अभियान चलाया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।” सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि वे हमेशा समाज की भावना और न्याय के पक्ष में रहे हैं और किसी भी भ्रांति या झूठे प्रचार से समाज में भ्रम और असंतोष फैलना उनके लिए स्वीकार्य नहीं है।
UGC नियमों पर मांगी सुधार की मांग
करण भूषण ने अपने बयान में UGC से अपील की कि वे इस नियम पर पुनः विचार करें और उसमें आवश्यक सुधार करें। उन्होंने कहा, “हम अपने शिक्षण संस्थानों को जातिगत संघर्ष का केंद्र बनने नहीं दे सकते। हमें ऐसा नियम नहीं चाहिए जो समाज में किसी प्रकार की असमानता या जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा नीति में सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और किसी भी नियम से समाज में वैमनुष्यता नहीं फैलनी चाहिए। सांसद का यह बयान समाज के शिक्षित वर्ग और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
UGC के नए नियमों के विरोध में पहले से ही सामान्य वर्ग और कुछ राजनीतिक दल मोर्चा खोल चुके हैं। भाजपा के कई नेता भी इन नियमों के खिलाफ सामने आ चुके हैं। इस बीच करण भूषण का बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का नया विषय बन गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सांसद का यह स्पष्ट खंडन और सुधार की मांग सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे यह संदेश गया कि शिक्षा नीति में किसी भी नियम को लागू करने से पहले व्यापक जनभागीदारी और समीक्षा जरूरी है। वहीं जनता भी उम्मीद कर रही है कि UGC नए नियमों में सुधार करके सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखेगा और शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाले नियमों से बचा जाएगा।
