Sunday, February 8, 2026
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जेल में कैसे थम गई शेख हसीना के करीबी हिंदू नेता की सांसें? रमेश चंद्र सेन की मौत पर उठे गंभीर सवाल

बांग्लादेश की राजनीति में हलचल मचाने वाली खबर—अवामी लीग के वरिष्ठ हिंदू नेता और पूर्व मंत्री रमेश चंद्र सेन की दिनाजपुर जेल में मौत. क्या यह प्राकृतिक मौत थी या हिरासत में हत्या? पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और देश के जाने-माने हिंदू अल्पसंख्यक चेहरे रमेश चंद्र सेन की दिनाजपुर जेल में मौत की खबर ने पूरे देश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है. शनिवार 7 फरवरी 2026 की सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई, जिसके कुछ ही देर बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. प्रशासन का कहना है कि यह मौत बीमारी की वजह से हुई, लेकिन जिस तरह से लगातार जेल में बंद अवामी लीग नेताओं की मौतें हो रही हैं, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. रमेश चंद्र सेन न सिर्फ पांच बार सांसद रहे थे, बल्कि शेख हसीना सरकार में जल संसाधन मंत्री जैसे अहम पद को भी संभाल चुके थे. ऐसे में उनकी जेल में मौत को सिर्फ एक सामान्य घटना मानना कई लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है.

जेल प्रशासन का दावा: अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम

जेल सुपरिटेंडेंट के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 9 बजे रमेश चंद्र सेन अचानक बेहोश हो गए थे. जेल अधिकारियों ने तुरंत उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, जहां करीब 9:30 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. प्रशासन का कहना है कि 86 वर्षीय सेन लंबे समय से कई बीमारियों से जूझ रहे थे और उनकी उम्र को देखते हुए स्वास्थ्य जोखिम पहले से मौजूद था. हालांकि, जेल से जुड़े सूत्रों और उनके करीबी लोगों का दावा है कि जेल के भीतर उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा और नियमित देखभाल नहीं मिल रही थी. इसी वजह से उनकी हालत धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई. इस दावे के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक वरिष्ठ नेता के साथ जेल प्रशासन ने लापरवाही बरती, या फिर इसके पीछे कोई और वजह छिपी है.

सरकार गिरने के बाद भी नहीं छोड़ा देश

रमेश चंद्र सेन को अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद गिरफ्तार किया गया था. उन पर हत्या सहित तीन गंभीर आरोप लगाए गए थे. उस समय सोशल मीडिया पर उनकी कुछ तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिनमें उनके हाथ रस्सी से बंधे हुए दिखाई दे रहे थे. इन तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना को जन्म दिया था. जब अवामी लीग के कई बड़े नेता देश छोड़कर भाग गए थे, तब सेन ने बांग्लादेश में ही रहने का फैसला किया. उनका कहना था कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और वे कानून का सामना करेंगे. यही वजह थी कि उनकी गिरफ्तारी के बाद भी उन्हें एक साहसी और सिद्धांतों वाला नेता माना गया. अब उनकी जेल में मौत ने इस पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है.

सोशल मीडिया पर उठा हत्या का आरोप

रमेश चंद्र सेन की मौत के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है. कई यूजर्स ने इसे “हिरासत में हत्या” बताया है और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है. दावा किया जा रहा है कि हिरासत में बीमार पड़ने के बाद अब तक कम से कम पांच शीर्ष अवामी लीग नेताओं की मौत हो चुकी है. इससे पहले भी विपक्षी दल और मानवाधिकार संगठन जेलों में बंद नेताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठाते रहे हैं. सेन का राजनीतिक सफर 1997 में उपचुनाव जीतने से शुरू हुआ था और वे 2008, 2014, 2018 और 2024 में सांसद बने. 2009 से 2014 तक जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने कई अहम परियोजनाओं पर काम किया था. ऐसे नेता की जेल में मौत ने बांग्लादेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है—क्या यह सिर्फ बीमारी से हुई मौत थी या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है?

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