उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले एक बड़ा संदेश देने की कोशिश के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की है। सोमवार को विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने यह ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका को समझती है और उनके योगदान का सम्मान करना उसका दायित्व है।
प्रदेश में लाखों की संख्या में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण अभियान और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाती हैं। लंबे समय से इन कार्यकर्ताओं द्वारा मानदेय बढ़ाने की मांग की जा रही थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा को सरकार की सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण नीति के तहत बड़ा कदम माना जा रहा है।
इससे पहले सरकार वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन और निराश्रित विधवा पेंशन की राशि बढ़ाने की घोषणा भी कर चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।
‘फियर जोन’ से ‘फेथ जोन’ तक की यात्रा का दावा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कानून व्यवस्था को विकास की पहली शर्त बताते हुए कहा कि प्रदेश अब ‘फियर जोन’ से ‘फेथ जोन’ में बदल चुका है। उन्होंने कहा कि बिना ‘रूल ऑफ लॉ’ के किसी भी राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है। पिछले नौ वर्षों में सरकार ने अपराध और अराजकता पर सख्ती से कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री के अनुसार वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश कर्फ्यू, अपराध और असुरक्षा की खबरों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब उत्सव, निवेश और विकास की पहचान बन रही है। टेंपल इकोनॉमी और पर्यटन को बढ़ावा देकर सरकार ने रोजगार के नए अवसर भी तैयार किए हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदेश अब राजस्व अधिशेष (रेवन्यू सरप्लस) की स्थिति में है और निवेशकों के लिए भरोसेमंद स्थान बन चुका है। सरकार के मुताबिक, डबल इंजन की नीति के तहत केंद्र और राज्य मिलकर योजनाओं को जमीन पर उतार रहे हैं, जिसका सीधा लाभ जनता को मिल रहा है।
विपक्ष पर हमला, वंदे मातरम विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने वंदे मातरम के विरोध को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में रहकर राष्ट्रगीत न गाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राज्यपाल के प्रति कथित अभद्र व्यवहार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं और उनके प्रति किसी भी प्रकार का असम्मान लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने विपक्ष के व्यवहार को नकारात्मक मानसिकता का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे ऐसी परंपरा स्थापित करें जिससे आने वाली पीढ़ियों को सकारात्मक संदेश मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल विकास और नीति पर चर्चा करने के बजाय विवादों को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं।
रोजगार, विकास और सामाजिक सुरक्षा पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि प्रदेश में तीन करोड़ युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। सरकारी भर्तियों, स्वरोजगार योजनाओं और निवेश परियोजनाओं के माध्यम से युवाओं को जोड़ा गया है। स्टार्टअप नीति और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण, गरीब कल्याण और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का फैसला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल इन कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कर्मचारी हितों पर ध्यान केंद्रित कर सरकार सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रही है। मानदेय बढ़ोतरी की घोषणा को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस घोषणा को किस समयसीमा में लागू करती है और इससे प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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