मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने बेटे की शादी को लेकर ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया। आम तौर पर जब किसी मुख्यमंत्री या बड़े नेता के परिवार में शादी होती है, तो लोग भव्य आयोजन, लंबी गाड़ियाँ और हाई-प्रोफाइल मेहमानों की उम्मीद करते हैं। लेकिन सीएम मोहन यादव ने स्टेटस और तामझाम से दूर हटकर सादगी को चुना। उन्होंने बेटे की शादी सामूहिक विवाह समारोह में कराई, जहां एक मंच पर कई अन्य जोड़ों ने भी सात फेरे लिए। इस फैसले की हर तरफ तारीफ हो रही है क्योंकि यह पहली बार हुआ है कि किसी मुख्यमंत्री ने अपने बेटे की शादी जनसहभागिता के बीच इतनी सादगी से कराई हो।
बाबा बागेश्वर और रामदेव की अनोखी बारात
CM मोहन यादव के बेटे की शादी की सबसे खास बात यह रही कि इस समारोह में बाराती के रूप में बाबा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और योग गुरु बाबा रामदेव भी पहुंचे। आम शादियों में जहां लोग सुपरस्टार या राजनीतिक चेहरों की झलक देखते हैं, वहीं यहां आध्यात्मिक और योग जगत के बड़े नाम बाराती बनकर आए। उनकी उपस्थिति से समारोह और भी खास और चर्चित हो गया। दोनों ने दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद दिया और सामूहिक विवाह जैसी सामाजिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री के इस निर्णय की प्रशंसा भी की।
लाल लहंगे में सजीं डॉक्टर बहू
दूल्हा-दुल्हन की जोड़ी भी बेहद खास रही। दुल्हन, जो कि पेशे से डॉक्टर हैं, पारंपरिक लाल लहंगे में सजी बेहद खूबसूरत दिखाई दीं। वहीं दूल्हे ने भी सादगी और परंपरा दोनों का संतुलन बनाए रखा। विवाह मंच पर दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई तो उपस्थित लोगों ने तालियों और शुभकामनाओं के साथ इस पल को यादगार बना दिया। सामूहिक विवाह में शामिल परिवारों ने भी कहा कि एक मुख्यमंत्री का परिवार जब ऐसी परंपरा निभाता है, तो समाज को सादगी और समानता का बड़ा संदेश मिलता है।
जनसहभागिता और सादगी का संदेश
सीएम मोहन यादव का यह कदम न सिर्फ चर्चा का विषय बना बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी साबित हुआ। उन्होंने दिखाया कि सामाजिक परंपराओं को निभाने के लिए भव्य आयोजन जरूरी नहीं होते, बल्कि भावनाएं और सहानुभूति कहीं ज्यादा मायने रखती हैं। सामूहिक विवाह के माध्यम से उन्होंने न केवल सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी प्रेरणा दी कि सामूहिक विवाह एक बेहतर और संस्कारी विकल्प हो सकता है। उनके इस फैसले को सोशल मीडिया पर भी खूब सराहा जा रहा है और लोग इसे एक मिसाल के रूप में देख रहे हैं।
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