Saturday, February 21, 2026
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बिजली बिल में ‘छिपा झटका’? 10% फ्यूल सरचार्ज पर भड़के चंद्रशेखर आजाद, योगी सरकार से मांगा जवाब

यूपी में बिजली बिलों पर 10% फ्यूल सरचार्ज और एफपीपीए चार्ज को लेकर सांसद चंद्रशेखर आजाद ने योगी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे अनुचित वसूली बताते हुए सरचार्ज वापस लेने और पारदर्शिता की मांग की।

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उत्तर प्रदेश में बिजली बिलों पर 10% फ्यूल सरचार्ज लगाए जाने के फैसले ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इस अतिरिक्त वसूली को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि महंगाई के दौर में घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर यह नया बोझ डालना अन्यायपूर्ण है। चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि फ्यूल सरचार्ज और एफपीपीए चार्ज के नाम पर की जा रही वसूली अब गंभीर जनचिंता का विषय बन चुकी है।

उन्होंने अपने बयान में लिखा कि जिस दर पर बिजली खरीदी जा रही है, उससे कई गुना अधिक कीमत पर उपभोक्ताओं को बेची जा रही है। ऐसे में सीमित लागत वृद्धि का पूरा भार सीधे आम जनता पर डालना गलत है। उनका कहना है कि बिजली विभाग पहले से ही ऊंची दरें वसूल रहा है, इसलिए अतिरिक्त लागत का समायोजन प्रबंधन सुधार और कार्यकुशलता बढ़ाकर किया जाना चाहिए, न कि उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ डालकर।

घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर असर

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि प्रदेश में लाखों ऐसे परिवार हैं, जिनके लिए सामान्य बिजली बिल भरना भी मुश्किल होता है। लोग अपने रोजमर्रा के खर्चों में कटौती कर किसी तरह बिल जमा करते हैं, लेकिन अब 10% फ्यूल सरचार्ज और एफपीपीए चार्ज ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। उन्होंने इसे व्यवस्था की संवेदनहीनता करार दिया और कहा कि सरकार को आम लोगों की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।

उद्योग संगठनों की चिंता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए भारी साबित हो सकती है। उत्पादन लागत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा घटेगी और रोजगार के अवसरों पर भी असर पड़ेगा। उनका सवाल है कि अगर ईंधन की कीमतों में थोड़ी वृद्धि हुई है, तो उसका पूरा भार उपभोक्ताओं पर क्यों डाला जा रहा है? क्या बिजली वितरण कंपनियों के पास लागत प्रबंधन के अन्य विकल्प नहीं हैं?

पारदर्शिता पर सवाल, उपभोक्ता अधिकारों की बात

सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि बिना पारदर्शी सूचना के बिलों में “ईंधन एवं बिजली अधिभार/ एफपीपीए चार्ज” जोड़कर हजारों रुपये की अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी दिए बिना बिल में नई मद जोड़ना उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि बिल निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए ताकि लोगों को यह समझ में आ सके कि अतिरिक्त राशि क्यों ली जा रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से सीधे सवाल किया कि थोड़े से खर्च बढ़ने की सजा जनता क्यों भुगते? उनका कहना है कि बिजली एक आवश्यक सेवा है, इसे अतिरिक्त वसूली का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव न पड़े।

सरकार के सामने रखीं चार प्रमुख मांगें

चंद्रशेखर आजाद ने यूपी सरकार के सामने चार स्पष्ट मांगें रखी हैं। पहली, 10% फ्यूल सरचार्ज को तुरंत वापस लिया जाए या कम से कम स्थगित किया जाए। दूसरी, छोटे उपभोक्ताओं और MSME इकाइयों को विशेष राहत दी जाए ताकि उन पर आर्थिक दबाव कम हो। तीसरी, बिल निर्धारण और अधिभार की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए और उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी दी जाए। चौथी, बिजली वितरण कंपनियों के पास यदि अधिशेष धन जमा है तो उससे उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।

उन्होंने कहा कि जब तक इन मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक जनता में असंतोष बना रहेगा। उनका मानना है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि लोगों में भरोसा कायम रहे। यूपी में बिजली बिलों पर 10% फ्यूल सरचार्ज का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

 

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