यूपी की राजनीति में एक बार फिर एक नया विवाद छिड़ गया है।एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को लेकर बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। एक निजी कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए सिंह ने दावा किया कि ओवैसी के पूर्वज हिंदू थे और उनका जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था। उनके अनुसार कई परिवार इतिहास में समय-समय पर धर्म परिवर्तन करते रहे हैं, लेकिन वर्तमान समय में ऐसी बातें लोग भूल जाते हैं।
सिंह के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग इसे राजनीतिक बयानबाज़ी बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे इतिहास के संदर्भ में समझने की बात कह रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि यूपी वार्ता न्यूज़ नहीं करता। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक नया विमर्श शुरू हो गया है कि क्या राजनीतिक बयान व्यक्तिगत इतिहास पर केंद्रित होने चाहिए या नहीं।
बृजभूषण का कहना था कि भारत में धर्म परिवर्तन की परंपरा नई नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि समाजों और समुदायों ने समय के साथ अनेक परिवर्तनों को स्वीकार किया है, और यही भारत की विविधता है। उनके अनुसार ओवैसी के पूर्वज भी कभी हिंदू थे और बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार किया। उनका कहना था कि यह कोई ऐसी बात नहीं है जिसे छिपाया जाए या विवाद बनाया जाए, बल्कि समाजों के विकास का हिस्सा माना जाना चाहिए।
वंदेमातरम विवाद पर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा किया
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने भाषण में सिर्फ ओवैसी पर नहीं रुके। उन्होंने वंदेमातरम विवाद पर भी अपनी बात रखी और इस मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उनके अनुसार कांग्रेस जानबूझकर ऐसे विषय उठाती है, जिससे जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटक जाए। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता यात्रा का प्रतीक है। आज़ादी के संघर्ष में वंदेमातरम ने लोगों में एकता और उत्साह जगाया था तथा हिंदू-मुस्लिम सभी समुदाय के लोग इसे समान रूप से गाते थे।
सिंह ने कहा कि जिन्ना के अलावा किसी भी बड़े मुस्लिम नेता ने वंदेमातरम का विरोध नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि भारत में रहने वाले लगभग 80 प्रतिशत मुसलमान कभी हिंदू ही थे और उन्होंने किसी न किसी दौर में धर्म परिवर्तन किया। इसलिए वंदेमातरम का विरोध करना परंपरा और इतिहास दोनों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों को बार-बार उछालना केवल राजनीतिक लाभ के लिए होता है और इसका कोई वास्तविक आधार नहीं है।
उनका कहना था कि भारत जैसे विविध देश में ऐसी बहसें राष्ट्र को मजबूत करने के बजाय उसे विभाजित करती हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि विभाजनकारी राजनीति और विवादों को हवा देकर पार्टी आज भी अपनी खोई जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है।
कल्कि धाम के निर्माण को बताया धार्मिक आस्था का विषय
अपने संबोधन के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने हाल ही में सुर्खियों में रहे कल्कि धाम को भी लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि वे स्वयं कल्कि धाम जाकर आ चुके हैं और वहां हो रहे निर्माण कार्य को बेहद भव्य बताया। उनके अनुसार मंदिर परिसर को आधुनिकता और परंपरा दोनों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके निर्माण का शिलान्यास किया था और आचार्य प्रमोद कृष्णम निर्माण और प्रबंधन की देखरेख कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह धाम कलियुग के अंत में होने वाले कल्कि अवतार की मान्यता से जुड़ा हुआ है। शास्त्रों में उल्लेख है कि जब कलियुग अपनी चरम सीमा पर पहुंचेगा, तब भगवान विष्णु का कल्कि रूप जन्म लेगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हमेशा व्यक्तिगत आस्था का विषय रहा है। कोई चाहे तो इसे माने, कोई चाहे तो इसे मिथक माने — दोनों ही स्थितियां भारतीय संस्कृति में स्वीकार्य हैं।
सिंह ने कहा कि कल्कि धाम उन लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र बनेगा जो इस विश्वास को मानते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि धाम बनने से क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आसपास के गांवों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
बयान से बढ़ी राजनीतिक गर्मी, कई सवालों ने उठाया सिर
ओवैसी पर की गई टिप्पणी और उसके बाद वंदेमातरम तथा कल्कि धाम पर दिए गए बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि व्यक्तिगत इतिहास और धार्मिक पृष्ठभूमि को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए। वहीं बीजेपी समर्थकों का कहना है कि सिंह ने केवल ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखा है। इस बयानबाज़ी के बीच सोशल मीडिया पर बहस का दौर जारी है, जहां लोग अपने-अपने विचार रख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी चुनावी मौसम नजदीक आता है, पहचान, धर्म और इतिहास जैसे विषय तेज़ी से उभरते हैं। बृजभूषण शरण सिंह का बयान भी इन्हीं बहसों के बीच आया है और आने वाले समय में इस पर और प्रतिक्रियाओं की उम्मीद है। कई विशेषज्ञ इसे भाजपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे एक व्यक्तिगत अभिव्यक्ति बता रहे हैं।
इस बीच, ओवैसी की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि क्या ओवैसी इस बयान को उन्होंने पर व्यक्तिगत हमला मानेंगे, या इसे राजनीति का हिस्सा मानकर अनदेखा कर देंगे।
कुल मिलाकर, बृजभूषण शरण सिंह के इस बयान ने न सिर्फ पुरानी ऐतिहासिक बहसों को नई हवा दी है, बल्कि धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई चर्चाओं का रास्ता भी खोल दिया है।
