Sunday, February 1, 2026
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शिंदे के गढ़ में ‘खेला’! अंबरनाथ में BJP-कांग्रेस की अजब युति, शिवसेना रह गई हक्की-बक्की

अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी और कांग्रेस के अप्रत्याशित गठबंधन ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। शिंदे की शिवसेना के गढ़ में हुए इस सियासी खेल की पूरी कहानी पढ़ें।

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महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई है। जिस बीजेपी को देशभर में कांग्रेस की सबसे बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है, उसी बीजेपी ने ठाणे जिले के अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ मिलकर ऐसा दांव खेला है, जिसने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सकते में डाल दिया है। स्थानीय निकाय चुनावों में सामने आए इस गठबंधन ने न सिर्फ शिवसेना को झटका दिया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या महाराष्ट्र में राजनीतिक दोस्ती और दुश्मनी अब पूरी तरह हालात पर निर्भर हो गई है। मुंबई से सटे अंबरनाथ नगर परिषद में हुआ यह सियासी ‘खेला’ अब राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन चुका है।

अंबरनाथ का गणित और शिवसेना की चूक

अंबरनाथ नगर परिषद को लंबे समय से शिंदे गुट की शिवसेना का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण-डोंबिवली से सांसद श्रीकांत शिंदे का राजनीतिक प्रभाव भी इस इलाके में काफी मजबूत माना जाता है। हालिया नगर परिषद चुनाव में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी, लेकिन बहुमत का आंकड़ा छूने से चूक गई। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर उम्मीद थी कि बीजेपी, जो राज्य और केंद्र दोनों में शिवसेना की सहयोगी है, उसके साथ मिलकर नगर परिषद की सत्ता संभालेगी।

लेकिन यहीं पर सियासी समीकरण पलट गए। बीजेपी ने आखिरी वक्त में शिवसेना की बजाय कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया। दोनों दलों ने मिलकर बहुमत जुटाया और बीजेपी के पार्षद को नगर परिषद अध्यक्ष चुन लिया गया। यह फैसला शिवसेना के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, क्योंकि यह गठबंधन सीधे-सीधे शिंदे गुट की पकड़ वाले इलाके में किया गया।

शिवसेना का तीखा हमला और श्रीकांत शिंदे की प्रतिक्रिया

बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन की खबर सामने आते ही शिंदे गुट की शिवसेना में नाराजगी साफ नजर आने लगी। शिंदे गुट के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इस गठबंधन को ‘अभद्र युति’ बताते हुए बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उनका कहना था कि जिन दलों की विचारधाराएं एक-दूसरे के बिल्कुल खिलाफ हैं, उनका एक साथ आना सिर्फ सत्ता की राजनीति को दर्शाता है।
वहीं, सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन को लेकर सवाल बीजेपी से ही पूछे जाने चाहिए, क्योंकि जवाब भी वही दे सकती है। श्रीकांत शिंदे ने यह भी दोहराया कि बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन वर्षों पुराना है और उसे मजबूत बने रहना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना ने अंबरनाथ में विकास के कई काम किए हैं और पार्टी आगे भी विकास की राजनीति करने वालों के साथ खड़ी रहेगी। हालांकि, उनकी प्रतिक्रिया में नाराजगी और निराशा दोनों साफ झलकती दिखी।

बीजेपी की सफाई और आगे की सियासी तस्वीर

शिवसेना के आरोपों के बाद बीजेपी ने भी अपनी ओर से सफाई पेश की है। बीजेपी के उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा कि पार्टी ने शिवसेना से गठबंधन को लेकर कई बार बातचीत करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उन्होंने बताया कि जब स्थिति साफ नहीं हुई, तब पार्टी को मजबूरी में दूसरा विकल्प चुनना पड़ा। बीजेपी का कहना है कि यह फैसला स्थानीय परिस्थितियों और नगर परिषद के सुचारू संचालन को ध्यान में रखकर लिया गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंबरनाथ की यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले समय में बड़े बदलावों का संकेत दे सकती है। स्थानीय स्तर पर बने ऐसे गठबंधन राज्य और विधानसभा राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं। खास बात यह है कि यह गठबंधन शिंदे गुट के प्रभाव वाले इलाके में हुआ है, जिससे भविष्य में बीजेपी और शिवसेना के रिश्तों में खटास बढ़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले नगर निगम और विधानसभा चुनावों में यह ‘अजब युति’ क्या नया सियासी समीकरण गढ़ती है।

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