जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए घोषित युद्धविराम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संघर्ष किसी समस्या का समाधान नहीं है और बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। फारूक अब्दुल्ला ने भगवान का शुक्रिया अदा किया कि दोनों देशों ने अपने मसलों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की हिम्मत दिखाई। उन्होंने अपने बयान में कहा, “लड़ाई कभी समाधान नहीं ला सकती, इसलिए मैं सभी देशों के लिए इस संघर्ष विराम की मुबारकबाद देता हूं।” फारूक ने यह भी कहा कि ईरान-अमेरिका वार्ता का उद्देश्य वैश्विक शांति सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि यदि यह संघर्ष जारी रहता, तो दुनिया भर में असुरक्षा और आर्थिक संकट पैदा हो सकता था। उनका मानना है कि युद्धविराम से न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया को राहत मिलेगी।
विदेश में काम कर रहे नागरिकों के लिए चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के कई लोग मध्य पूर्व के देशों में काम करते हैं और इस जंग के कारण उनकी जिंदगी और परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। फारूक ने कहा, “अगर यह संघर्ष जारी रहता, तो हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ जाती। हमारे लोग जो विदेश में काम करके घर की जिम्मेदारियां निभाते हैं, वे सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते थे।” उन्होंने भारत सरकार से उम्मीद जताई कि वह इस मामले में मध्यस्थता करके युद्धविराम को स्थायी बनाने में मदद करेगी। फारूक ने कहा कि भारत अमेरिका का मित्र है, और अगर देश सक्रिय भूमिका निभाएगा, तो क्षेत्र में शांति जल्दी स्थापित हो सकती है।
मोदी सरकार पर तीखी आलोचना
फारूक अब्दुल्ला ने भारत सरकार के कदमों की आलोचना करते हुए कहा कि युद्ध से पहले भारत ने फिलिस्तीन के मुद्दे को नजरअंदाज करके इजरायल का पक्ष लिया, जो उनका कहना है, “सबसे बुरा कदम” था। उन्होंने कहा कि दुनिया अब बदल चुकी है और चीन व रूस जैसे देश वैश्विक महाशक्तियों के रूप में उभर चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने भारत की विदेश नीति पर जोर देते हुए कहा कि देश को हमेशा गुटनिरपेक्षता की नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने रूस के साथ समझौते और चीन के साथ पंचशील नीति बनाए रखे हैं। फारूक ने सुझाव दिया कि भारत को सभी देशों के साथ मित्रतापूर्ण और संतुलित संबंध बनाए रखना चाहिए।
पाकिस्तान को चेतावनी और शांति की अपील
फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान को भी चेतावनी दी कि आतंकवाद का रास्ता छोड़कर विकास और शांति की राह अपनाई जाए। उन्होंने कहा कि लगातार जारी संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल रहा है। फारूक ने 10 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली वार्ता को महत्वपूर्ण बताया और उम्मीद जताई कि इसके बाद क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “शांति की ओर कदम उठाने से ना सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि भारत और विश्व की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। हमें आशा है कि युद्धविराम सफल होगा और इसके जरिए आर्थिक और मानवीय नुकसान को कम किया जा सकेगा।”
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