अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अजित पवार को न्याय दिलाना है तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को खुद इस जांच की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। रोहित पवार ने साफ कहा कि वे इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री को एक विस्तृत पत्र लिख रहे हैं, जिसमें जांच की धीमी रफ्तार और संभावित साजिशों का जिक्र होगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस शरद पवार के निवास पर आयोजित की गई, जहां रोहित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता इस हादसे की सच्चाई जानना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से व्यक्तिगत संबंध अच्छे थे, इसलिए उम्मीद है कि वे निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करेंगे। रोहित पवार के मुताबिक, यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और व्यावसायिक साजिश की आशंका भी हो सकती है।
जांच पर सवाल और मंत्री के इस्तीफे की मांग
रोहित पवार ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि हादसे के शुरुआती चरण में ही VSR एयरलाइंस को एक तरह से क्लीन चिट दे दी गई थी। उनका आरोप है कि जब जांच पूरी भी नहीं हुई थी, तब कंपनी को सुरक्षित घोषित करने जैसी बातें सामने आना कई सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि TDP नेतृत्व से जुड़ी एक फैमिली कंपनी ने VSR को आर्थिक सहायता दी थी। ऐसे में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। रोहित पवार ने कहा कि जब एक राजनीतिक दल से जुड़ा नेता नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभाल रहा हो और उसी दल से जुड़े कारोबारी हित इस मामले में सामने आएं, तो जांच पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
VSR एयरलाइंस पर गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रोहित पवार ने VSR एयरलाइंस पर नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कंपनी कई सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही थी, फिर भी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि कंपनी के पीछे कुछ बेहद शक्तिशाली लोग खड़े हैं, जिनके कारण कार्रवाई से बचाने की कोशिश की जा रही है।
रोहित पवार ने यह भी कहा कि हादसे के बाद भी VSR की फ्लाइटें सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक कंपनी को संचालन की अनुमति क्यों दी जा रही है। उनका दावा है कि कंपनी अपना कारोबार दुबई और अमेरिका शिफ्ट करने की तैयारी में है, जिससे यह आशंका और गहरा जाती है कि कहीं जिम्मेदार लोग देश छोड़ने की तैयारी तो नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं, बल्कि देश की विमानन सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।
DGCA की भूमिका और तकनीकी सवाल
रोहित पवार ने DGCA की भूमिका पर भी कई सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या DGCA VSR को बचाने का काम कर रहा है? उन्होंने कहा कि हादसे के बाद कई तकनीकी पहलुओं पर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। जैसे कि पायलट को आखिरी समय पर क्यों बदला गया, उड़ान का समय क्यों बदला गया, और विमान में आवश्यकता से अधिक ईंधन क्यों भरा गया।
उनका कहना है कि ये सभी बिंदु बेहद गंभीर हैं और इनकी जांच जरूरी है। रोहित पवार ने दावा किया कि जैसे ही उन्होंने ये सवाल सार्वजनिक रूप से उठाए, सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ ट्रोलिंग शुरू हो गई। उन्होंने यहां तक कहा कि उनकी जान को खतरा हो सकता है, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं। उनका मानना है कि यदि अभी आवाज नहीं उठाई गई, तो सच्चाई कभी सामने नहीं आएगी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के कई दिन बीत जाने के बावजूद प्राथमिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। आमतौर पर ऐसे मामलों में शुरुआती रिपोर्ट जल्द जारी की जाती है, लेकिन इस मामले में देरी हो रही है। रोहित पवार का कहना है कि जांच को जानबूझकर टाला जा रहा है ताकि समय के साथ मामला ठंडा पड़ जाए। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले।
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