करीब 18 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA आखिरकार साइन हो गया है। इस समझौते के तहत भारत और यूरोप के 27 देशों के बीच व्यापार को आसान बनाया जाएगा। आसान शब्दों में कहें तो अब दोनों तरफ के देशों में सामान बेचने पर लगने वाला भारी टैक्स धीरे-धीरे खत्म या बहुत कम कर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह अब तक की सबसे बड़ी और असरदार ट्रेड डील मानी जा रही है। इस समझौते से भारत के करीब 97 प्रतिशत उत्पादों को यूरोप भेजते समय कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा, जिससे भारत को हर साल अरबों डॉलर की बचत होगी और भारतीय कंपनियों को बड़ा बाजार मिलेगा।
बीयर, वाइन, चॉकलेट और पास्ता क्यों हो जाएंगे सस्ते?
भारत-EU FTA का सबसे सीधा असर आम लोगों की जेब पर दिखेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोप से आने वाली बीयर पर टैक्स में करीब 50 प्रतिशत तक कटौती हो सकती है। इसका मतलब है कि जो विदेशी बीयर अभी बहुत महंगी मिलती है, वह आने वाले समय में आधे दाम पर भी मिल सकती है। इसी तरह वाइन की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना है। सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि चॉकलेट, पास्ता और अन्य यूरोपीय फूड प्रोडक्ट्स भी सस्ते होंगे। इन चीज़ों पर अभी लगभग 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है, जो FTA के बाद खत्म हो सकता है। इससे मिडिल क्लास और युवाओं को सीधा फायदा मिलेगा और विदेशी प्रोडक्ट्स अब लग्ज़री नहीं रह जाएंगे।
लग्ज़री कारों और ऑटो सेक्टर में आएगा सबसे बड़ा बदलाव
इस फ्री ट्रेड डील का सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर में देखने को मिल सकता है। फिलहाल यूरोप से आने वाली कारों पर भारत में 100 से 110 प्रतिशत तक भारी टैक्स लगता है। FTA लागू होने के बाद यह टैक्स घटकर सिर्फ 10 प्रतिशत तक आ सकता है। इसका मतलब है कि BMW, Mercedes, Audi जैसी यूरोपीय कारें अब पहले से काफी सस्ती हो सकती हैं। इससे भारत में लग्ज़री कारों की बिक्री बढ़ेगी और ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा तेज होगी। वहीं दूसरी ओर, भारत में बनने वाले ऑटो पार्ट्स और गाड़ियां भी यूरोप में सस्ते दाम पर बिक सकेंगी, जिससे भारतीय कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वैश्विक हालात में भारत-EU डील क्यों है बेहद अहम?
भारत-EU FTA ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया में व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ी हुई है। अमेरिका द्वारा हाई टैरिफ लगाए जाने के बाद कई देशों को नए बाजारों की तलाश है। भारत पर अमेरिका के ऊंचे टैक्स से निर्यात को नुकसान हुआ, ऐसे में यूरोपीय यूनियन के साथ यह डील भारत के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आई है। यूरोपीय यूनियन भी अब पारंपरिक साझेदारों से आगे बढ़कर नए देशों के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है। इस समझौते के तहत EU का लक्ष्य है कि 2032 तक भारत के साथ 96 प्रतिशत सामानों पर टैक्स पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, जिससे यूरोप को भी हर साल अरबों डॉलर की बचत होगी। कुल मिलाकर, यह डील सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि भारत और यूरोप के बीच भरोसे और लंबे समय की साझेदारी की शुरुआत मानी जा रही है, जिसका फायदा किसानों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं—तीनों को मिलेगा।
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