देशभर में सिगरेट पीने वालों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार द्वारा तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लागू किए जाने के बाद सिगरेट की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 फरवरी 2026 से लागू किए गए नए कर ढांचे के कारण कई प्रमुख ब्रांड्स की कीमतों में 19 प्रतिशत से लेकर 41 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर कंपनियों की लागत पर असर डालेगी, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर आएगा। खास तौर पर मिड-सेगमेंट और प्रीमियम ब्रांड्स की कीमतों में अधिक वृद्धि देखी जा सकती है। तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और स्वास्थ्य के लिहाज से खपत को कम करना बताया जा रहा है।
Gold Flake और Classic पर कितना असर?
प्रमुख ब्रांड्स जैसे Gold Flake और Classic की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग पैक साइज और सेगमेंट के हिसाब से कीमतों में 19% से 41% तक का अंतर हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, जो पैक पहले 200 रुपये के आसपास मिलता था, वह नई दरों के बाद 240 से 280 रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि अंतिम रिटेल प्राइस कंपनियों द्वारा तय किए जाएंगे, लेकिन अतिरिक्त ड्यूटी का असर लगभग सभी लोकप्रिय ब्रांड्स पर पड़ेगा। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि ग्राहकों ने पहले ही संभावित बढ़ोतरी की खबर के बाद स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है।
क्यों बढ़ाई गई ड्यूटी और क्या है सरकार की मंशा?
सरकार लंबे समय से तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाकर खपत कम करने की नीति पर काम कर रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों से जुड़े रोगों का आर्थिक बोझ बहुत बड़ा है। ऐसे में टैक्स बढ़ाकर एक तरफ राजस्व में वृद्धि होती है, तो दूसरी तरफ कीमत बढ़ने से खपत पर नियंत्रण की कोशिश भी की जाती है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए घोषित अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी से खासकर युवा उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा और नए स्मोकर्स की संख्या में कमी आ सकती है। हालांकि उद्योग जगत का तर्क है कि अत्यधिक टैक्स से अवैध या सस्ते विकल्पों की मांग भी बढ़ सकती है, जिससे समानांतर बाजार सक्रिय हो सकता है।
उपभोक्ताओं और बाजार पर संभावित असर
सिगरेट की कीमतों में 19-41 प्रतिशत तक की संभावित वृद्धि से रिटेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि कीमत बढ़ने पर बिक्री में अस्थायी गिरावट आ सकती है, लेकिन नियमित उपभोक्ताओं पर इसका सीमित प्रभाव होगा। वहीं, शेयर बाजार में तंबाकू कंपनियों के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत को पूरी तरह ग्राहकों पर डालती हैं, तो मुनाफे के मार्जिन में संतुलन बना रह सकता है। दूसरी ओर, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस कदम को सकारात्मक मान रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि महंगी सिगरेट से धूम्रपान की आदत कम होगी। फिलहाल कंपनियों द्वारा आधिकारिक नई कीमतों की घोषणा का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में सिगरेट खरीदना जेब पर पहले से ज्यादा भारी पड़ सकता है।
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