बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे लगातार हमलों के बीच अब यह मुद्दा सीधे चुनावी राजनीति में प्रवेश कर चुका है। देश के चर्चित हिंदू नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने आगामी राष्ट्रीय चुनाव में उतरने का ऐलान कर दिया है। खास बात यह है कि वे बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पारंपरिक और मजबूत मानी जाने वाली संसदीय सीट गोपालगंज-3 (कोटालीपाड़ा–तुंगीपाड़ा) से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं। यह वही इलाका है, जिसे लंबे समय तक शेख हसीना और उनके परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का चुनावी मैदान में उतरना सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की राजनीतिक बेचैनी और असुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
कौन हैं गोबिंद चंद्र प्रमाणिक, क्यों लिया बड़ा फैसला
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (Jatiya Hindu Mohajote) की केंद्रीय समिति के महासचिव हैं और पेशे से एक वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं। वे लंबे समय से बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं। हाल के महीनों में मंदिरों पर हमले, घरों में तोड़फोड़ और डर के माहौल ने उन्हें राजनीति में उतरने के लिए मजबूर किया। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का कहना है कि उन्होंने कभी किसी राजनीतिक दल की सदस्यता नहीं ली और न ही वे पारंपरिक पार्टी राजनीति का हिस्सा रहे हैं। उनके अनुसार, “राजनीतिक दलों से चुने गए सांसद अक्सर पार्टी लाइन और अनुशासन में बंधे रहते हैं, जिससे वे आम लोगों की असली समस्याएं खुलकर नहीं उठा पाते। मैं बिना किसी पार्टी के दबाव के जनता की आवाज संसद तक पहुंचाना चाहता हूं।” यही सोच उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में लेकर आई है।
28 दिसंबर को नामांकन, हसीना की सीट पर कड़ा मुकाबला
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक 28 दिसंबर को आधिकारिक रूप से अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। उनकी एंट्री से गोपालगंज-3 सीट पर मुकाबला और रोचक हो गया है। इस सीट से पहले ही कई बड़े और छोटे दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एसएम जिलानी, नेशनल सिटिजन पार्टी के आरिफुल दरिया, जमात-ए-इस्लामी के एमएम रेजाउल करीम, गण अधिकार परिषद के अबुल बशर और इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के मारुफ शेख जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा कई अन्य निर्दलीय उम्मीदवार भी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे में शेख हसीना की पारंपरिक सीट पर बहुकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का मैदान में उतरना हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
सियासी संदेश और बांग्लादेश की बदलती राजनीति
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक की उम्मीदवारी को सिर्फ एक चुनावी लड़ाई नहीं, बल्कि एक सशक्त सियासी संदेश माना जा रहा है। यह संदेश है कि बांग्लादेश का हिंदू समुदाय अब सिर्फ पीड़ित की भूमिका में नहीं रहना चाहता, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज सत्ता के केंद्र तक पहुंचाना चाहता है। हाल के वर्षों में अल्पसंख्यकों पर हमलों ने देश की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी सवाल खड़े किए हैं। ऐसे माहौल में एक हिंदू नेता का शेख हसीना की सीट से चुनाव लड़ना प्रतीकात्मक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि गोबिंद चंद्र प्रमाणिक जनता का कितना भरोसा जीत पाते हैं और क्या उनका यह कदम बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यकों की भागीदारी को नया मोड़ दे पाएगा। फिलहाल, उनकी घोषणा ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस सीट पर सियासी सरगर्मी और तेज होने की उम्मीद है।
