शुक्रवार दोपहर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब करीब 1:20 बजे ज़मीन अचानक तेज़ी से कांपने लगी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5 से 5.4 के बीच आंकी गई, जिससे झटके कई सेकेंड तक महसूस होते रहे। भूकंप इतना तेज था कि लोग घबराकर अपने-अपने घरों, दफ्तरों और दुकानों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में लोग सड़क पर जमा हो गए और मोबाइल पर एक-दूसरे से हालचाल पूछते नजर आए। यह झटका अचानक आया, इसलिए किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के वर्षों में उन्होंने इतना तेज भूकंप कोलकाता में नहीं महसूस किया था।
केंद्र बांग्लादेश में, कोलकाता तक महसूस हुआ असर
प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, भूकंप का केंद्र पड़ोसी देश बांग्लादेश में बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश के खुलना डिवीजन के सतखीरा इलाके में इसका केंद्र था, जो ज़मीन के लगभग 35 किलोमीटर नीचे स्थित था। इसी वजह से भूकंप का असर कोलकाता सहित पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में महसूस किया गया। साल्ट लेक, न्यू टाउन और मध्य कोलकाता जैसे इलाकों में इमारतों के हिलने की खबरें सामने आईं। कुछ घरों में अलमारियों से सामान नीचे गिर गया, जिससे लोगों की दहशत और बढ़ गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी बड़े जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
दफ्तरों और बाजारों में मची अफरा-तफरी
भूकंप का समय कामकाजी घंटों का था, इसलिए दफ्तरों, सरकारी इमारतों और निजी कंपनियों में मौजूद कर्मचारी घबराकर सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखे। कई दफ्तरों में कुछ देर के लिए काम रोक दिया गया और कर्मचारियों को बाहर सुरक्षित जगह पर खड़ा किया गया। बाजारों और मॉल्स में भी लोग दुकानों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। किसी ने लिखा कि पूरी इमारत हिल रही थी, तो किसी ने कहा कि यह उनकी ज़िंदगी का सबसे तेज झटका था। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters और European Mediterranean Seismological Centre (EMSC) ने भी भूकंप की तीव्रता 5.4 बताए जाने की पुष्टि की है।
डर के बीच राहत, लेकिन सवाल बरकरार
भूकंप के बाद राहत और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभाग अलर्ट मोड में आ गए। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक सूचनाओं का इंतजार करें। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तीव्रता का भूकंप आमतौर पर गंभीर नुकसान नहीं करता, लेकिन पुराने या कमजोर ढांचों को खतरा हो सकता है। फिलहाल कोलकाता और आसपास के इलाकों में हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। फिर भी, इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़े शहर भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं? लोग अब भी डरे हुए हैं और कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर कुछ समय तक खुले स्थानों में रहने का फैसला किया है।
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