मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध के खतरे के बीच 25 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने एक अहम ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई, जिसमें देश की विदेश नीति और सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा हुई। इस बैठक में विपक्ष ने कई तीखे सवाल उठाए, खासकर नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत को लेकर। विपक्ष जानना चाहता था कि भारत इस पूरे संकट में क्या भूमिका निभा रहा है और क्या भारत किसी तरह की मध्यस्थता की दिशा में बढ़ रहा है। बैठक के दौरान माहौल उस समय और गरम हो गया जब पाकिस्तान के संभावित मध्यस्थ बनने की खबरों पर सवाल उठे। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि भारत की प्राथमिकता शांति और अपने नागरिकों की सुरक्षा है, न कि किसी तीसरे पक्ष के रूप में हस्तक्षेप करना।
जयशंकर का सख्त बयान—भारत की नीति स्पष्ट
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मुद्दे पर बेहद स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “हम दलाल देश नहीं बन सकते,” जो कि भारत की विदेश नीति की दिशा को दर्शाता है। उनका कहना था कि भारत हमेशा शांति का समर्थक रहा है, लेकिन वह किसी भी तरह के मध्यस्थ के रूप में खुद को प्रस्तुत नहीं करेगा, खासकर तब जब स्थिति बेहद संवेदनशील हो। उन्होंने यह भी बताया कि पीएम मोदी ने ट्रंप से बातचीत के दौरान यही कहा कि युद्ध का अंत होना चाहिए, क्योंकि इससे सभी देशों को नुकसान होता है। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत वैश्विक स्तर पर संतुलन बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता दे रहा है।
पाकिस्तान की पेशकश और पुराना कूटनीतिक इतिहास
इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा का केंद्र बनी रही। शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर बयान देकर कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी के लिए तैयार है, यदि दोनों देश सहमत हों। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जयशंकर ने बताया कि अमेरिका लंबे समय से पाकिस्तान को इस तरह की बातचीत में शामिल करता रहा है, जो कि 1981 से जारी है। हालांकि भारत ने इस तरह की किसी भी भूमिका से खुद को अलग रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह पेशकश खुद को वैश्विक मंच पर सक्रिय दिखाने की कोशिश है, लेकिन भारत का रुख इससे बिल्कुल अलग और अधिक संतुलित नजर आता है।
ऊर्जा और भारतीयों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस
बैठक में विपक्ष ने पश्चिम एशिया के हालात का भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर असर को लेकर भी चिंता जताई। इस पर सरकार ने भरोसा दिलाया कि देश में कच्चे तेल और गैस की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। साथ ही सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति की व्यवस्था भी की जा रही है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि बैठक के बाद विपक्ष के कुछ नेताओं, जिनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर शामिल हैं, ने कहा कि कई सवालों के जवाब संतोषजनक नहीं थे और इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। कुल मिलाकर यह बैठक भारत की विदेश नीति, सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाने की एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
