असम विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान एक भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जब मशहूर दिवंगत गायक Zubeen Garg की पत्नी Garima Saikia Garg खराब तबीयत के बावजूद वोट डालने पहुंचीं। जानकारी के मुताबिक, गरिमा को एक दिन पहले ही अस्पताल से छुट्टी मिली थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने नागरिक कर्तव्य को प्राथमिकता दी। वोट डालने के बाद जब उन्होंने मीडिया से बात की, तो उनकी आवाज में दर्द और आंखों में आंसू साफ नजर आए। उन्होंने कहा कि वोट देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और इसी भावना के साथ वे मतदान केंद्र तक पहुंचीं।
“हमेशा साथ आते थे…”—यादों ने किया भावुक
मीडिया से बातचीत के दौरान गरिमा सैकिया गर्ग ने अपने दिवंगत पति को याद करते हुए कहा कि पहले वे हमेशा Zubeen Garg के साथ ही वोट डालने जाया करती थीं। इस बार अकेले वोट देने आना उनके लिए बेहद मुश्किल और भावनात्मक पल था। उन्होंने कहा, “हमेशा हम साथ आते थे, लेकिन अब…” इतना कहते ही वे भावुक हो गईं। उनके इस बयान ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। इस दौरान उनकी बहन भी उनके साथ थीं, जिन्होंने मीडिया से अनुरोध किया कि गरिमा की तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए उनसे ज्यादा सवाल न किए जाएं।
इंसाफ की उम्मीद अभी भी जिंदा
गरिमा ने अपने पति की मौत के मामले में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वे लगातार न्याय के लिए लड़ रही हैं और उम्मीद करती हैं कि जल्द ही उन्हें इंसाफ मिलेगा। उन्होंने बताया कि परिवार अभी भी इस घटना को लेकर जवाब चाहता है। हालांकि, उन्होंने ज्यादा विस्तार से बात करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनकी तबीयत फिलहाल ठीक नहीं है। गौरतलब है कि Zubeen Garg का निधन पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में हुआ था, जहां वे एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। शुरुआत में इस घटना को लेकर कई तरह के संदेह जताए गए थे।
जांच में हादसा करार, फिर भी सवाल बरकरार
मामले की जांच के बाद सिंगापुर की स्टेट कोरोनर कोर्ट ने इस घटना को दुर्घटनावश डूबने का मामला बताया और किसी साजिश से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे किसी साजिश की पुष्टि हो सके। इसके बावजूद, परिवार और फैंस के मन में कई सवाल अभी भी मौजूद हैं। Garima Saikia Garg की इस भावुक अपील ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा में ला दिया है। चुनाव के बीच उनका यह कदम न सिर्फ लोकतंत्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि निजी दुख के बावजूद वे मजबूत बनी हुई हैं।
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