प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे और उसके बाद ईरान पर हुए हमले को लेकर देश में कई सवाल उठने लगे थे। सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या भारत सरकार को इस हमले की पहले से जानकारी थी। अब इस पर सरकार ने आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट कर दी है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में जवाब देते हुए कहा कि इजरायल की ओर से भारत के साथ इस हमले को लेकर कोई पूर्व चर्चा नहीं की गई थी। यानी भारत को इस सैन्य कार्रवाई की पहले से कोई जानकारी नहीं थी।
दौरा और समझौतों पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने 25 और 26 फरवरी को इजरायल का दो दिवसीय दौरा किया था। यह उनका दूसरा दौरा था, जबकि 2017 में उन्होंने पहली बार वहां कदम रखा था। इस बार के दौरे में दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कुल 16 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करना था। हालांकि, इस दौरे के कुछ ही दिन बाद 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी।
हमले के बाद बढ़ा तनाव
ईरान पर हुए इस हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस कार्रवाई से ईरान की परमाणु क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है और जल्द ही हालात सामान्य हो सकते हैं। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि वह किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। इस बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
वैश्विक राजनीति में नई हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिका को अपने सहयोगी देशों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों ने खुलकर समर्थन देने से इनकार कर दिया। इससे नाराज होकर ट्रंप ने नाटो से बाहर निकलने तक की बात कह दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अनिश्चितता और बढ़ गई है। ऐसे माहौल में भारत का यह बयान कि उसे हमले की पहले से जानकारी नहीं थी, कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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