दिल्ली के पॉश इलाके न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में जो हुआ, उसने न सिर्फ एक परिवार को झकझोर दिया बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए। देखने में यह मामला किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा डरावनी है। वर्दी, फर्जी पहचान पत्र और रौबदार अंदाज में आए लोगों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग के घर में रेड डाली और लाखों की लूट को अंजाम दे दिया। इस पूरी साजिश की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस ‘फिल्मी लूट’ की स्क्रिप्ट घर में काम करने वाली मेड ने ही लिखी थी।
पॉश कॉलोनी में फर्जी रेड, घरवाले रह गए सहमे
न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के डी-ब्लॉक में रहने वाले 86 वर्षीय रिटायर्ड सीनियर आर्किटेक्ट आर.सी. सबरवाल उस वक्त घर पर मौजूद थे, जब तीन लोग पुलिस की वर्दी में अचानक उनके घर में दाखिल हुए। इन लोगों ने खुद को ED अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके पास घर की तलाशी का आदेश है। सख्त लहजे और सरकारी अंदाज से घरवालों को इतना डराया गया कि किसी ने विरोध करने की हिम्मत तक नहीं की। आरोपियों ने सबसे पहले सभी के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए, ताकि कोई बाहर संपर्क न कर सके। घर का माहौल पूरी तरह से दहशत में बदल गया और बुजुर्ग दंपती समेत पूरा परिवार खुद को बेबस महसूस करने लगा।
वर्दी, फर्जी आईडी और कार—पूरी प्लानिंग के साथ आए थे आरोपी
जांच में सामने आया कि आरोपी पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे। वे एक बलेनो कार में आए थे, जो गिरोह के एक सदस्य के नाम पर रजिस्टर्ड थी। किसी ने शक न करे, इसके लिए उन्होंने ITBP के डिप्टी कमांडेंट जैसी वर्दी पहन रखी थी। उनके पास फर्जी आईडी कार्ड, वायरलेस हैंडसेट और सरकारी भाषा में बात करने का पूरा अभ्यास था। सब कुछ इतना असली लग रहा था कि पढ़ा-लिखा परिवार भी भ्रम में आ गया। उन्होंने घर की तलाशी के नाम पर अलमारियां खुलवाईं, कीमती सामान निकलवाया और परिवार को एक कमरे में बंद कर दिया, ताकि कोई मदद न मांग सके।
घर की मेड निकली मास्टरमाइंड, अंदर की हर जानकारी थी लीक
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब पुलिस जांच में सामने आया कि घर की मेड रेखा देवी ही इस साजिश की मुख्य कड़ी थी। वह लंबे समय से इस घर में काम कर रही थी और घर के हर सदस्य की दिनचर्या से अच्छी तरह वाकिफ थी। उसने अपने साथियों को बता दिया था कि घर में कौन-कौन रहता है, किस समय कौन बाहर होता है और कीमती जेवर व नकदी कहां रखी जाती है। आरोपियों ने इसी जानकारी के आधार पर वारदात को अंजाम दिया। जब पीड़ित के पोते को कुछ गड़बड़ महसूस हुई और उसने सवाल पूछने शुरू किए, तो आरोपी घबरा गए और जल्दबाजी में 3–4 लाख रुपये नकद और 7 महंगी घड़ियां लेकर फरार हो गए।
तकनीकी सर्विलांस से खुला राज, पुलिस ने तोड़ी ‘फिल्मी’ साजिश
घटना के बाद मामले की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस हरकत में आई। तकनीकी सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की मदद से पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर ली। धीरे-धीरे पूरी साजिश की परतें खुलती गईं और साफ हो गया कि यह कोई सामान्य चोरी नहीं, बल्कि अंदर की जानकारी के आधार पर की गई सुनियोजित फर्जी रेड थी। पुलिस ने आरोपियों को पकड़कर फर्जी वर्दी, आईडी कार्ड और लूट का सामान बरामद कर लिया है। यह मामला एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है कि सिर्फ बाहर के लोग ही नहीं, बल्कि घर के अंदर मौजूद भरोसेमंद चेहरे भी कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं।
