ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने समाज और शिक्षा व्यवस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया है। एक आवासीय विद्यालय, जहाँ माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में भेजते हैं, वहीं के मुखिया यानी हेडमास्टर पर महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगा है। आरोपी हेडमास्टर, जिसकी पहचान ‘रे’ के रूप में हुई है, पर आरोप है कि वह लंबे समय से स्कूल की महिला कर्मचारियों और आसपास की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार कर रहा था। शुरुआत में महिलाओं ने लोक-लाज के डर से चुप्पी साधे रखी, लेकिन जब हेडमास्टर की हिम्मत बढ़ती गई और उसने अपनी मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं, तो यह मामला आग की तरह पूरे गांव में फैल गया। इस खुलासे के बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ था और लोग सही मौके के इंतजार में थे।
भीड़ का ‘स्पॉट जस्टिस’: गले में जूतों की माला और चेहरे पर कालिख
सोमवार की सुबह सुंदरगढ़ के इस गांव में न्याय का एक अलग ही रूप देखने को मिला। जैसे ही महिलाओं के साथ हुई बदसलूकी की पुष्टि हुई, आक्रोशित ग्रामीणों का हुजूम स्कूल के मुख्य द्वार पर जमा हो गया। ग्रामीणों ने किसी कानूनी प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय खुद ही ‘इंसाफ’ करने का फैसला किया। भीड़ ने आरोपी हेडमास्टर को उसके केबिन से घसीटकर बाहर निकाला। गुस्से से तमतमाए लोगों ने पहले उसकी जमकर धुनाई की और फिर उसके गले में फटे-पुराने जूतों की माला डाल दी। इतना ही नहीं, हेडमास्टर के चेहरे पर कालिख पोतकर उसे पूरे गांव की सड़कों पर घुमाया गया। इस ‘शर्मनाक परेड’ के दौरान महिलाएं भी सबसे आगे रहीं, जो हेडमास्टर को उसके किए की सजा भुगतने की बात कह रही थीं। गांव की गलियों में घुमाते समय हेडमास्टर बार-बार माफी मांगता रहा, लेकिन भीड़ का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था।
पुलिस की कार्रवाई और कानून का हाथ: मौके पर पहुंचे सुरक्षाबल
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम आनन-फानन में गांव पहुंची। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तेजित भीड़ के चंगुल से हेडमास्टर को सुरक्षित बाहर निकालना था। काफी मशक्कत और ग्रामीणों को समझाने-बुझाने के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी हेडमास्टर के खिलाफ छेड़छाड़, महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने और पोक्सो (POCSO) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, पुलिस ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि लोगों ने कानून अपने हाथ में लिया। पुलिस ने साफ किया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि दोबारा कोई हिंसक झड़प न हो।
प्रशासनिक हड़कंप और सुरक्षा पर सवाल: क्या अब बदलेंगे नियम?
इस घटना ने सुंदरगढ़ के जिला शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मचा दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए हेडमास्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) करने के आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही, स्कूल के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है कि क्या उन्हें इन हरकतों के बारे में पहले से पता था। यह घटना आवासीय विद्यालयों में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर समय रहते स्कूल प्रबंधन ने शिकायतों पर गौर किया होता, तो आज स्थिति इतनी हिंसक नहीं होती। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ऐसे ‘भ्रष्ट’ शिक्षकों के खिलाफ क्या सख्त उदाहरण पेश करता है, ताकि भविष्य में शिक्षा के मंदिर में कोई दोबारा ऐसी हिम्मत न कर सके।
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