देश में बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे राहत की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कमर्शियल एलपीजी (LPG) की सप्लाई बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब तक जहां सीमित मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही थी, वहीं 23 मार्च से इसकी आपूर्ति बढ़ाकर प्री-क्राइसिस स्तर के करीब 50 प्रतिशत तक कर दी जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। सरकार का मानना है कि इस कदम से जरूरी सेवाओं पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और आम लोगों को अप्रत्यक्ष राहत मिलेगी।
किन सेक्टरों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
सरकार ने साफ किया है कि बढ़ाई गई गैस सप्लाई का सबसे ज्यादा फायदा उन क्षेत्रों को मिलेगा, जहां इसकी तत्काल जरूरत है। इसमें रेस्टोरेंट, होटल, ढाबे, औद्योगिक कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और डेयरी सेक्टर शामिल हैं। इसके अलावा, सरकारी सब्सिडी वाले कैंटीन, कम्युनिटी किचन और प्रवासी मजदूरों के लिए इस्तेमाल होने वाले छोटे सिलेंडर भी प्राथमिकता में रखे गए हैं। खास बात यह है कि अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि जरूरी सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रह सकें। पिछले एक हफ्ते में हजारों मीट्रिक टन एलपीजी की सप्लाई कर सरकार ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है।
PNG को बढ़ावा, रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी
एलपीजी पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत उपभोक्ताओं और व्यावसायिक संस्थानों को PNG की ओर शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अनिवार्य किया जा रहा है, ताकि गैस वितरण प्रणाली को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके। सरकार का मानना है कि PNG के इस्तेमाल से न केवल एलपीजी पर निर्भरता कम होगी, बल्कि लंबी अवधि में यह एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प भी साबित होगा। इससे पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
राज्यों में लागू हो रहे निर्देश, राहत की उम्मीद
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले ही केंद्र के निर्देशों के मुताबिक गैर-घरेलू एलपीजी की सप्लाई बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए हैं। बाकी जगहों पर भी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां तेजी से सप्लाई सुनिश्चित कर रही हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी का आवंटन जरूरत के आधार पर किया जाएगा, ताकि किसी क्षेत्र में कमी न हो। इस फैसले से खासतौर पर छोटे व्यवसायों और फूड सर्विस सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में यह कदम ऊर्जा संकट को कितना कम कर पाता है और आम लोगों को कितनी राहत मिलती है।
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