बिहार के छपरा जिले में शुक्रवार को जयप्रकाश विश्वविद्यालय की स्नातक पार्ट-प्रथम (विशेष) परीक्षा के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को भावुक और प्रेरित कर दिया। एकमा निवासी जितेंद्र राय और बसंती देवी की पुत्री नेहा कुमारी ने सुबह करीब पांच बजे एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। सामान्य परिस्थितियों में कोई भी महिला आराम और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती, लेकिन नेहा की सोच अलग थी। अपने सपनों और पढ़ाई के प्रति समर्पण ने उन्हें कुछ ही घंटों बाद परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। परीक्षा देने का उनका निर्णय न सिर्फ साहस की मिसाल बना बल्कि परीक्षार्थियों और शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का बड़ा स्रोत बन गया।
जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए बनाई गई खास व्यवस्था
नेहा की स्थिति को देखते हुए परीक्षा केंद्र प्रशासन और कॉलेज के अधिकारियों ने तुरंत विशेष कदम उठाए। परीक्षा केंद्र जयप्रकाश महिला महाविद्यालय, छपरा में नेहा की सुरक्षा और नवजात की देखभाल को ध्यान में रखते हुए एक अनोखा फैसला लिया गया। उनके लिए गाड़ी को ही अस्थायी परीक्षा कक्ष घोषित कर दिया गया, जिससे दोनों को आराम और सुरक्षित माहौल मिल सके। यह निर्णय मानवता और संवेदनशीलता का अद्भुत उदाहरण बन गया। परीक्षा से पहले कॉलेज प्रशासन ने चिकित्सकीय जरूरतों को भी सुनिश्चित किया और वातावरण को ऐसा बनाया कि मां और बच्चे दोनों को किसी तरह की असुविधा न हो।
नवजात को गोद में लेकर लिखी उत्तर पुस्तिका
दोपहर 1:15 बजे जैसे ही दूसरी पाली की परीक्षा शुरू हुई, नेहा नवजात को गोद में लेकर उत्तरपुस्तिका लिखने लगीं। यह दृश्य परीक्षा केंद्र में मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गया। कई शिक्षकों ने इसे अपने करियर का सबसे भावुक क्षण बताया, जबकि साथी परीक्षार्थी नेहा की हिम्मत और दृढ़ संकल्प को देखकर दंग रह गए। नेहा की आंखों में अपने भविष्य के प्रति उम्मीद थी और गोद में बच्चा उनके संघर्ष और सपनों का नया साथी बनकर मौजूद था। उनका यह साहस यह साबित करता है कि इच्छाशक्ति बड़ी हो तो किसी भी स्थिति में अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया जाता।
नेहा बनी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा—सपनों से समझौता नहीं
यह घटना केवल एक परीक्षा और एक मां की जिम्मेदारी की कहानी नहीं है, बल्कि यह देशभर की लड़कियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश है। नेहा ने दिखा दिया कि कठिन परिस्थितियां भी सपनों के रास्ते की दीवार नहीं बन सकतीं। समाज में जहां अक्सर मातृत्व और करियर के बीच चुनाव को चुनौती माना जाता है, वहीं नेहा ने अपने साहस से इस सोच को नई दिशा दी। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल रही है और लोग उन्हें ‘इतिहास लिखने वाली मां’ कह कर सम्मान दे रहे हैं। नेहा की यह यात्रा न सिर्फ छपरा बल्कि पूरे बिहार और देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
