गोवा के मशहूर बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर की रात लगी आग ने सबको दहला दिया। रात करीब 11:45 बजे लगी आग देखते ही देखते इतनी फैल गई कि कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग धुएं से भर गई। अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं मिला और अफरातफरी में 25 लोगों की जान चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि क्लब में उस समय लाइव म्यूजिक और पार्टी चल रही थी, इसी दौरान स्टेज के पास इलेक्ट्रिक पटाखे फोड़े गए और चिंगारी सीधे डेकोरेशन पर गिर गई। आग इतनी तेज थी कि कर्मचारी चाहकर भी उसे काबू नहीं कर सके।
घटना के बाद गोवा पुलिस, फायर विभाग और प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। लेकिन ज़्यादातर मरने वाले लोग किचन स्टाफ और वर्कर थे, जो पीछे बने छोटे कमरों में फंसे रह गए। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हादसे को “गोवा का सबसे दर्दनाक हादसा” बताया और जांच के आदेश दिए।
जांच में खुली लापरवाही की पोल
घटना की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। नाइटक्लब के मालिक गौरव लूथरा और सौरभ लूथरा, दोनों दिल्ली के कारोबारी हैं। शुरुआती जांच में पता चला कि क्लब में सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम भी पूरे नहीं थे। क्लब का निकास मार्ग बेहद संकरा था, फायर अलार्म काम नहीं कर रहे थे और बिजली के तार खुले पड़े थे।
गोवा पुलिस ने FIR दर्ज होते ही जांच टीम को दिल्ली भेजा, जहां लूथरा भाइयों के घर और ऑफिस पर छापेमारी हुई। लेकिन पुलिस को दोनों में से एक भी नहीं मिला। दोनों के फोन लगातार बंद आ रहे थे। मजबूरी में पुलिस ने उनके ठिकानों पर नोटिस चस्पा किया और कानूनी कार्रवाई शुरू की।
जांच में ये भी पता चला कि क्लब को फायर सेफ्टी का रिन्यूड सर्टिफिकेट नहीं मिला था, लेकिन फिर भी क्लब चलता रहा। सवाल अब स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद क्लब को कैसे ऑपरेट करने दिया गया।
मुंबई से इंडिगो फ्लाइट पकड़कर फरार
सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब गोवा पुलिस ने मुंबई इमिग्रेशन से संपर्क किया। यहां से पता चला कि हादसे की रात यानी 6 दिसंबर को आग लगने के कुछ घंटों बाद ही दोनों मालिक मुंबई पहुंच गए थे। 7 दिसंबर सुबह 5:30 बजे दोनों भाई इंडिगो की फ्लाइट नंबर 6E 1073 से थाईलैंड के फुकेत के लिए रवाना हो गए। उस समय न तो FIR दर्ज हुई थी और न ही LOC जारी हुआ था। इससे साफ होता है कि उन्हें अंदाजा था कि जांच का घेरा उनके आसपास कस सकता है और इसलिए वे पहले ही देश छोड़कर निकल गए।
दूसरी ओर, गोवा पुलिस ने 7 दिसंबर की शाम को दोनों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, दोनों विदेश पहुंच चुके थे। पुलिस ने अब इंटरपोल की मदद लेने के लिए CBI की इंटरपोल डिवीजन से औपचारिक संपर्क किया है।
इस केस में दिल्ली के एक व्यक्ति भारत कोहली को हिरासत में लिया गया है, जिसने क्लब संचालन में भूमिका निभाई थी। उसे ट्रांजिट रिमांड पर गोवा लाया गया है।
इंटरपोल नोटिस की तैयारी, लेकिन विशेषज्ञ बोले – ‘वापसी आसान नहीं’
कानून विशेषज्ञों के मुताबिक भारत और थाईलैंड के बीच आपराधिक मामलों में प्रत्यार्पण प्रक्रिया लंबी होती है। कई बार आरोपी एक देश से दूसरे देश में आसानी से मूव कर लेते हैं, जिससे जांच और भी मुश्किल हो जाती है। संभावना है कि लूथरा भाई थाईलैंड से किसी तीसरे देश भी जा सकते हैं। इसलिए इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जरूरी कदम माना जा रहा है।
इन आधारों पर IPC की कई धाराओं सहित IBN (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 105, 125 और 287 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
वहीं, मृतकों के परिवार इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई परिजन गोवा पहुंचे और सरकार से पूछा, “हमारे बच्चों की जान लेने वालों को कब तक बचाएंगे?”
अब सबकी नजर इस बात पर है कि इंटरपोल के जरिए दोनों भाइयों की गिरफ्तारी कब होती है और भारत उन्हें कब वापस ला पाता है।
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