जम्मू-कश्मीर में एक चीनी नागरिक की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले हफ्ते गिरफ्तार किए गए हू कोंगताई नामक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने भारत में पर्यटक वीजा पर आने के बावजूद नियमों को तोड़ा और उन क्षेत्रों में पहुंच गया, जहां विदेशी नागरिकों के लिए प्रवेश प्रतिबंधित है। अधिकारियों के अनुसार उसने लद्दाख और कश्मीर के कई सामरिक महत्व वाले स्थानों का दौरा किया और वहां की गतिविधियों की गहराई से जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश की। ये दोनों क्षेत्र वर्तमान स्थिति में भारत–चीन संबंधों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।
हू कोंगताई पर सेना की तैनाती की जानकारी जुटाने का आरोप
सुरक्षा एजेंसियों को जांच में पता चला कि हू कोंगताई सिर्फ पर्यटन के उद्देश्य से नहीं आया था। अधिकारियों के अनुसार उसने उन क्षेत्रों की यात्रा की, जहां भारतीय सेना की यूनिटें तैनात रहती हैं। आरोप है कि वह तैनाती के पैटर्न, मूवमेंट, सड़क मार्ग, कैंप लोकेशन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विवरण जानने की कोशिश कर रहा था। माना जा रहा है कि उसने स्थानीय लोगों से भी इन विषयों पर बातचीत की। ये गतिविधियाँ वीजा शर्तों के गंभीर उल्लंघन के साथ-साथ सुरक्षा जोखिम भी हैं। इसी कारण उसे तुरंत हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और उसके मोबाइल, कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।
पूछताछ के बाद हांगकांग निर्वासित किया गया
जांच एजेंसियों ने हू कोंगताई से कई दिनों तक पूछताछ की। अधिकारियों ने बताया कि चीनी नागरिक! अपने उद्देश्यों को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं दे सका और कई सवालों पर गोलमोल बयान देता रहा। उसकी गतिविधियों और यात्रा के तरीके को देखकर सुरक्षा एजेंसियों ने उसे देश के लिए संभावित खतरा मानते हुए कार्रवाई की। भारत सरकार ने वीजा शर्तों के बड़े उल्लंघन को ध्यान में रखते हुए उसे भारत में रहने की इजाजत रद्द कर दी और अंततः हांगकांग निर्वासित कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों पर भारत कड़ी निगरानी रखता है और कोई भी विदेशी नागरिक यदि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी गतिविधियों पर सख्त निगरानी
लद्दाख और कश्मीर लंबे समय से सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गिने जाते हैं। चीन के साथ सीमा तनाव के बाद इन इलाकों में विदेशी नागरिकों की यात्रा पर खास पाबंदियाँ लागू हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई विदेशी नागरिक बिना अनुमति इन क्षेत्रों में पहुंचते पाए गए हैं, लेकिन हू कोंगताई का मामला अधिक गंभीर इसलिए माना गया क्योंकि वह सैन्य तैनाती से संबंधित जानकारी को लेकर सक्रिय था। विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना स्पष्ट करती है कि भारत को संवेदनशील इलाकों में विदेशी यात्रियों की गतिविधियों की और अधिक कड़ी निगरानी करने की आवश्यकता है। सरकार लगातार संदेश दे रही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी।
