Sunday, February 1, 2026
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आज रात आसमान में होगा चौंकाने वाला नज़ारा! साल का सबसे चमकीला वुल्फ सुपरमून करेगा सबको हैरान

3 जनवरी 2026 को वुल्फ सुपरमून आसमान में दिखाई देगा। यह 2026 का पहला और सबसे चमकीला सुपरमून होगा। जानिए भारत में इसे देखने का सही समय, खासियत और इससे जुड़ी रोचक जानकारी।

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नए साल की शुरुआत आसमान में एक बेहद खास और दुर्लभ नज़ारे के साथ होने जा रही है। 3 जनवरी 2026 की रात को वुल्फ सुपरमून दिखाई देगा, जो पूरे साल का पहला पूर्ण चंद्रमा होने के साथ-साथ सबसे चमकीले सुपरमून में भी गिना जाएगा। आम पूर्णिमा की तुलना में यह चंद्रमा आकार में थोड़ा बड़ा और रोशनी में कहीं ज्यादा तेज नजर आएगा। खगोल विज्ञान के अनुसार, जब पूर्ण चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नज़दीकी बिंदु पर होता है, तब उसे सुपरमून कहा जाता है। इसी कारण इस बार का वुल्फ मून सामान्य चांद से कहीं ज्यादा आकर्षक दिखाई देगा। यह खगोलीय घटना सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी रोमांच और उत्सुकता से भरी होगी, क्योंकि ऐसा नज़ारा साल में बहुत कम बार देखने को मिलता है।

वुल्फ मून नाम के पीछे छुपी सदियों पुरानी कहानी

जनवरी महीने की पूर्णिमा को वुल्फ मून कहे जाने के पीछे एक दिलचस्प इतिहास जुड़ा हुआ है। यह नाम उत्तरी गोलार्ध की प्राचीन लोक परंपराओं से आया है, जहां कड़ाके की ठंड और बर्फीली रातों में भेड़ियों के झुंडों की आवाजें दूर-दूर तक सुनाई देती थीं। उन आवाजों को लोगों ने इस पूर्णिमा से जोड़ दिया और धीरे-धीरे यह नाम प्रचलन में आ गया। समय के साथ-साथ यह नाम केवल एक कहानी नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक पहचान बन गया। आज दुनिया भर में हर महीने की पूर्णिमा को अलग-अलग पारंपरिक नामों से जाना जाता है। इस बार का वुल्फ मून इसलिए भी खास है क्योंकि यह सुपरमून की श्रेणी में आता है। साथ ही, इसी अवधि में पृथ्वी सूर्य के अपेक्षाकृत करीब होती है, जिससे चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी और ज्यादा परावर्तित होती है और चांद असाधारण रूप से चमकदार दिखाई देता है।

भारत में कब दिखेगा वुल्फ सुपरमून, जानिए सही समय

भारत में रहने वाले लोगों के लिए यह खगोलीय घटना देखने का सबसे अच्छा मौका 3 जनवरी की शाम को मिलेगा। सूर्यास्त के तुरंत बाद, करीब शाम 5:45 से 6:00 बजे के बीच चंद्रमा पूर्वी क्षितिज पर उगता हुआ दिखाई देगा। शुरुआत में यह चांद हल्के पीले या नारंगी रंग का नजर आ सकता है, जो वातावरण में मौजूद धूल और नमी के कारण होता है। जैसे-जैसे चंद्रमा ऊपर चढ़ेगा, उसका रंग धीरे-धीरे चमकीले सफेद में बदल जाएगा। यह सुपरमून पूरी रात आकाश में दिखाई देगा और सुबह पश्चिम दिशा में अस्त होगा। खास बात यह है कि इस दौरान चंद्रमा के पास चमकता हुआ जूपिटर ग्रह भी देखा जा सकता है, जिससे यह दृश्य और भी मनमोहक बन जाएगा। खुले मैदान, छत या किसी ऊंची जगह से देखने पर यह नज़ारा और साफ नजर आ सकता है।

बिना किसी उपकरण के देखें, कैमरे में कैद करें यादगार पल

वुल्फ सुपरमून को देखने के लिए किसी महंगे या खास उपकरण की जरूरत नहीं है। यह खगोलीय दृश्य नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकता है। अगर आसमान साफ रहा, तो शहरों में भी इसकी चमक साफ दिखाई देगी। हालांकि, जिन लोगों के पास कैमरा, दूरबीन या टेलीस्कोप है, वे इस मौके को और खास बना सकते हैं। सुपरमून की रोशनी और उसका बड़ा आकार तस्वीरों में बेहद शानदार नजर आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम रोशनी वाले इलाके में जाकर चंद्रमा को देखने पर उसका आकार और चमक और ज्यादा प्रभावशाली लगती है। यह वुल्फ सुपरमून न सिर्फ खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए, बल्कि आम लोगों के लिए भी प्रकृति का एक ऐसा तोहफा है, जिसे देखकर साल की शुरुआत यादगार बन सकती है।

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