कांग्रेस नेता शशि थरूर अक्सर अपने बयानों और लेखन शैली के लिए सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। सोशल मीडिया पर डोनाल्ड ट्रंप और मशहूर अकादमिक महमूद ममदानी के विचारों की तारीफ़ करते हुए थरूर ने एक ऐसा क्रिप्टिक पोस्ट किया, जिसने राजनीति में नया बवंडर पैदा कर दिया। पोस्ट में उन्होंने नेतृत्व, राष्ट्रहित और राजनीति की प्राथमिकताओं पर जो संकेत दिए, वह सीधे तौर पर किसी नाम को लक्ष्य नहीं कर रहे थे, लेकिन उनका संदर्भ समझने में किसी को देर नहीं लगी। इस पोस्ट में मौजूद ‘पोलिटिकल इंटेंशन्स’ ने न सिर्फ मीडिया, बल्कि सियासी पार्टियों का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया।
BJP का वार—“थरूर ने खुद अपनी पार्टी को आईना दिखा दिया”
थरूर के इस पोस्ट के बाद सबसे तीखी प्रतिक्रिया भाजपा की ओर से आई। BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने दावा किया कि थरूर ने अपनी पार्टी कांग्रेस को सीधे-सीधे संदेश दिया है कि नेताओं को परिवारवाद के बजाय देश को प्राथमिकता देनी चाहिए। पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी आज भी गांधी परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है और राष्ट्रीय हित हमेशा पीछे छूट जाता है। उन्होंने कहा, “थरूर ने जो कहा वह कांग्रेस के अंदर की सच्चाई है, जिसे वह खुलकर नहीं कह पाते, इसलिए क्रिप्टिक संदेशों का रास्ता अपनाते हैं।” BJP के इस बयान के बाद यह विवाद और भी तीखा हो गया, क्योंकि उन्होंने इसे कांग्रेस की ‘आंतरिक नाराज़गी’ से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।
कांग्रेस की स्थिति असहज, थरूर के शब्दों का बढ़ता असर
कांग्रेस की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के अंदरुनी गलियारों में बेचैनी साफ देखी जा रही है। कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि थरूर के पोस्ट का समय बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि पार्टी 2025 के लिए अपनी नई रणनीति बनाने में लगी है। वहीं कुछ का कहना है कि थरूर अक्सर स्वतंत्र विचार रखते हैं, लेकिन उनका यह पोस्ट पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष सवाल उठाता है। यह पहली बार नहीं है जब थरूर के विचार कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग दिखाई दिए हों, लेकिन इस बार उनकी बातों को BJP की ओर से हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
आगे क्या? थरूर की चुप्पी और बढ़ा रही है सस्पेंस
इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प बात यह है कि शशि थरूर ने अपनी पोस्ट का कोई सीधा स्पष्टीकरण नहीं दिया। उनकी चुप्पी ने ही BJP के दावों को और हवा दी है। सवाल यह है कि क्या थरूर ने सचमुच पार्टी नेतृत्व की ओर इशारा करते हुए कोई संदेश दिया, या यह केवल किसी राजनीतिक विचार पर सामान्य टिप्पणी थी? कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल इस मामले को शांत तरीके से संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में थरूर की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं यह इस विवाद की दिशा तय करेगा।
