Delhi Blast: दिल्ली में हुए हालिया ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां और नगर निगम प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं। इसी कड़ी में पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में स्थित सैयद फैज इलाही मस्जिद और उससे सटी जमीन प्रशासन की रडार पर आ गई। जांच के दौरान जब जमीन के पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी लगभग 0.195 एकड़ भूमि को लेकर स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज अस्पष्ट पाए गए। इसके बाद मंगलवार देर रात दिल्ली नगर निगम (MCD) ने मौके पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। इस कार्रवाई के दौरान इलाके में तनाव भी देखने को मिला और पुलिस बल को तैनात करना पड़ा। प्रशासन का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई, जबकि मस्जिद प्रबंधन समिति इसे धार्मिक स्थल को निशाना बनाए जाने की कार्रवाई बता रही है।
जमीन पर किसका हक? MCD और वक्फ बोर्ड आमने-सामने
एककहना है कि मस्जिद प्रबंधन समिति या दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से इस जमीन पर मालिकाना हक साबित करने वाला कोई वैध दस्तावेज अब तक प्रस्तुत नहीं किया गया है। निगम अधिकारियों के अनुसार सरकारी रिकॉर्ड में यह भूमि सार्वजनिक संपत्ति के रूप में दर्ज है, जिस पर समय के साथ अवैध निर्माण होता चला गया। वहीं, मस्जिद की प्रबंध समिति का दावा है कि यह जमीन दशकों से मस्जिद और कब्रिस्तान के उपयोग में है और इसे धार्मिक संपत्ति माना जाना चाहिए। समिति का आरोप है कि बिना पूरी सुनवाई के बुलडोजर चलाना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। इस पूरे विवाद ने दिल्ली में सरकारी जमीनों पर बने धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और वैधता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
हाईकोर्ट की एंट्री, कई संस्थाओं से मांगा जवाब
मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। सैयद फैज इलाही मस्जिद की प्रबंध समिति ने एमसीडी की कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), शहरी विकास मंत्रालय, भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी संबंधित संस्थाओं को चार सप्ताह के भीतर अपना-अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक सभी पक्षों के दस्तावेज और रिकॉर्ड सामने नहीं आ जाते, तब तक किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस मामले में अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जिस पर पूरे शहर की नजरें टिकी हैं।
आतंकी कनेक्शन का दावा या सिर्सवाल अब भी बाकी
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सैयद फैज इलाही मस्जिद और उससे सटी जमीन का वास्तव में किसी आतंकी गतिविधि या दिल्ली ब्लास्ट से कोई सीधा संबंध है, या फिर यह सिर्फ सुरक्षा जांच के दौरान सामने आया एक भूमि विवाद है। फिलहाल जांच एजेंसियों ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन ब्लास्ट के बाद जिस तरह से इलाके की गहन जांच की गई, उसने कई पुराने मामलों को फिर से खोल दिया है। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से हर पहलू की जांच जरूरी है। वहीं, स्थानीय लोग और मस्जिद प्रबंधन इसे महज अतिक्रमण विवाद बताकर आतंकी कनेक्शन के दावों को खारिज कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की सुनवाई और सरकारी एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह मामला सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है या सिर्फ जमीन के कागजों की लड़ाई।
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