Prayagraj POCSO Case: Prayagraj में दर्ज पॉक्सो एक्ट के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले एक धर्मगुरु के शिष्य ने प्रेसवार्ता कर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि इस मामले में केवल दो नाम ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों से जुड़े कुछ बड़े और वीआईपी नेता भी शामिल हो सकते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि उनके पास एक लैपटॉप में ऐसे फोटो और वीडियो मौजूद हैं, जिनमें नाबालिगों के साथ कथित यौन शोषण के दृश्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समय आने पर संबंधित नामों का खुलासा किया जाएगा। इन दावों के सामने आने के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
“वीआईपी कनेक्शन” का दावा और गंभीर आरोप
प्रेसवार्ता में आरोप लगाने वाले पक्ष ने कहा कि कुछ आश्रमों और धार्मिक संस्थानों में कथित तौर पर बच्चों को प्रभावशाली लोगों के सामने पेश किया जाता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर सहित कुछ अन्य स्थानों पर भी इस तरह की घटनाएं हुईं। वक्ता ने दावा किया कि करीब 20 युवक-युवतियां इस पूरे मामले में पीड़ित हो सकते हैं। साथ ही आलीशान भवनों और सुविधाओं से जुड़े सबूत मिटाने की कोशिशों का भी आरोप लगाया गया। एक बड़े नेता पर यह आरोप भी लगाया गया कि उन्होंने माघ मेले के दौरान एक धरने को लेकर कथित तौर पर उकसाने की भूमिका निभाई थी। हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस जांच जारी है। आरोप लगाने वाले पक्ष ने मांग की है कि एफआईआर में नामजद सभी लोगों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
पुलिस जांच और मेडिकल प्रक्रिया
दूसरी ओर पुलिस ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। एक नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और डॉक्टरों की टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली है। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। दोनों नाबालिगों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए जा चुके हैं, जिससे केस की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक विशेष टीम जल्द ही संबंधित मठ में जाकर पूछताछ करेगी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि जिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जिक्र किया गया है, उनमें मौजूद सामग्री की सत्यता क्या है। पुलिस का कहना है कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर निगरानी भी की जा रही है।
सियासत, धर्म और कानून के बीच उलझा मामला
यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। धार्मिक नेतृत्व पर लगे आरोपों ने समाज के एक वर्ग को झकझोर दिया है, वहीं विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बयानबाजी भी तेज हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके। फिलहाल पुलिस की जांच और संभावित डिजिटल सबूतों की पड़ताल इस केस की दिशा तय करेगी। आने वाले दिनों में यदि नए नामों का खुलासा होता है, तो यह मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है। अभी सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
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