तिहाड़ जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है उसकी ओर से की गई 217 करोड़ रुपये लौटाने की पेशकश, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। सुकेश ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में एक आवेदन दाखिल कर कहा है कि वह 200 करोड़ रुपये की रंगदारी के मामले में शिकायतकर्ता अदिति सिंह को कुल 217 करोड़ रुपये देने के लिए तैयार है। हालांकि, उसने यह भी साफ किया है कि यह पेशकश उसके कानूनी अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी और इसे अपराध स्वीकार करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। कोर्ट में दी गई इस अर्जी के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर सुकेश अचानक इतनी बड़ी रकम लौटाने को क्यों राजी हो गया और अदिति सिंह कौन हैं, जिनके नाम पर यह पूरा मामला खड़ा है।
कौन हैं अदिति सिंह, जिनकी शिकायत से खुली ठगी की परतें
अदिति सिंह रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर शिवेंद्र मोहन की पत्नी हैं। शिवेंद्र मोहन अक्टूबर 2019 से जेल में बंद हैं और इसी दौरान यह पूरा ठगी का खेल शुरू हुआ। एफआईआर के मुताबिक, अदिति सिंह ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि 2020 और 2021 के बीच उनसे 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की जबरन वसूली और ठगी की गई। अदिति का कहना है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया था कि सरकार के शीर्ष स्तर से उनके पति की रिहाई में मदद की जा रही है। इस भरोसे के चलते उन्होंने अलग-अलग माध्यमों से बड़ी रकम ट्रांसफर की, जो बाद में ठगी साबित हुई। उनकी शिकायत के बाद ही सुकेश चंद्रशेखर के तिहाड़ जेल से चल रहे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
PMO और गृह मंत्रालय के नाम पर रचा गया बड़ा जाल
एफआईआर में दर्ज आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं। अदिति सिंह के अनुसार, सबसे पहले उन्हें एक महिला का कॉल आया, जिसने कहा कि कानून मंत्रालय के सचिव अनूप कुमार उनसे बात करेंगे। इसके बाद एक शख्स ने खुद को अनूप कुमार बताकर कॉल किया और कहा कि सरकार उनके पति की मदद करना चाहती है। कुछ समय बाद उसी व्यक्ति ने यह दावा किया कि वह स्पीकर पर है और गृह मंत्री अमित शाह भी बातचीत सुन रहे हैं। इतना ही नहीं, एक कॉल के दौरान ट्रू कॉलर पर नंबर पीएमओ के सलाहकार पीके मिश्रा के नाम से दिख रहा था, जिससे अदिति को पूरी तरह भरोसा हो गया। कॉल करने वालों ने कहा कि कोरोना काल में सरकार चाहती है कि शिवेंद्र मोहन जैसे अनुभवी लोग सहयोग करें और इसके बदले उनकी रिहाई संभव है। इसी भरोसे पर अदिति से लगातार संपर्क बना रहा और उनसे गोपनीयता बनाए रखने को कहा गया।
झूठे वादे, टेलीग्राम चैट और 200 करोड़ की वसूली
अदिति सिंह के मुताबिक, बाद में एक व्यक्ति अभिनव नाम से सामने आया, जिसने खुद को कानून मंत्रालय में अनूप कुमार का अवर सचिव बताया। यह संपर्क टेलीग्राम के जरिए किया गया और कहा गया कि सारी बातचीत गोपनीय रहेगी क्योंकि खुफिया एजेंसियां नजर रखे हुए हैं। अभिनव ने दावा किया कि सरकार के बड़े अधिकारी लैंडलाइन से ही बात करते हैं और देश के बड़े बिजनेस घराने इस पूरी प्रक्रिया की सुरक्षा में शामिल हैं। इन्हीं झूठे आश्वासनों के जरिए अदिति से अलग-अलग किस्तों में करीब 200 करोड़ रुपये वसूले गए। जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क तिहाड़ जेल से संचालित हो रहा था और इसके पीछे सुकेश चंद्रशेखर का दिमाग था। अब जब मामला कोर्ट में है और सबूत मजबूत हैं, तो सुकेश द्वारा 217 करोड़ लौटाने की पेशकश को कई लोग कानूनी रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। आने वाले समय में कोर्ट इस पेशकश को कैसे देखता है और अदिति सिंह को न्याय कब मिलता है, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।
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