राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते कई दिनों से चल रहा छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में अपनी मांगों को लेकर अड़े अभ्यर्थियों और सरकार के बीच बातचीत की राह आसान नजर नहीं आ रही है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर से यह प्रस्ताव सामने आया था कि छात्र प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास या उनके दफ्तर में आकर चर्चा कर सकता है। हालांकि, छात्रों ने सरकार की इस पेशकश को सिरे से खारिज कर दिया है। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि अब किसी भी तरह की हवाबाजी या खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, जब तक ठोस फैसला नहीं होता आंदोलन थमने वाला नहीं है।
‘न नड्डा का घर, न हमारा मंच’, न्यूट्रल वेन्यू की मांग पर अड़े छात्र
सरकार के इस प्रस्ताव पर CJP प्रवक्ता सौरभ दास और आंदोलन की अगुवाई कर रहे आशुतोष रांका ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कर दिया कि केंद्रीय मंत्री के घर या उनके दफ्तर में कोई भी बैठक नहीं होगी। छात्र नेताओं का कहना है कि संवाद हमेशा बराबरी के स्तर पर और किसी तटस्थ (न्यूट्रल) स्थान पर होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि या तो सरकार के प्रतिनिधि स्वयं जंतर-मंतर पर आकर अभ्यर्थियों की बात सुनें या फिर कोई ऐसी जगह तय की जाए जो न तो नड्डा जी का परिसर हो और न ही आंदोलनकारियों का मंच। इस कदम से छात्र नेताओं ने साफ संकेत दे दिया है कि वे अपनी शर्तों पर ही वार्ता की टेबल पर बैठेंगे।
छात्रों के हाथ में फैसला, जंतर-मंतर से गूंजी इंकार की आवाज
जंतर-मंतर के मंच से आशुतोष रांका ने प्रदर्शन में शामिल हजारों छात्रों को सीधे संबोधित करते हुए इस मुद्दे पर उनकी राय मांगी। उन्होंने वहां मौजूद अभ्यर्थियों से पूछा कि क्या उन्हें बातचीत के लिए नड्डा जी के घर या दफ्तर जाना चाहिए? इस पर पूरी भीड़ ने एक सुर में ‘ना’ कहकर सरकार के प्रस्ताव को नकार दिया। छात्रों के इस सामूहिक रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि वे अपने नेताओं के फैसलों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। जंतर-मंतर से गूंजी इस इनकार की आवाज ने प्रशासन और सरकार दोनों पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे अब गेंद पूरी तरह से सरकार के पाले में चली गई है।
आर-पार के मूड में CJP, क्या निकलेगा समाधान का नया रास्ता?
आंदोलनकारी छात्रों और CJP का यह अडिग रवैया यह साबित करता है कि वे इस बार बिना किसी लिखित और ठोस समाधान के पीछे हटने वाले नहीं हैं। ‘हवाबाजी नहीं चाहिए’ का नारा देकर अभ्यर्थियों ने यह संदेश दे दिया है कि वे केवल बैठकों का दौर जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि उन्हें अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों का त्वरित समाधान चाहिए। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार छात्रों की इस न्यूट्रल जगह वाली शर्त को स्वीकार करती है या बातचीत का यह सिलसिला यहीं ठहर जाता है। फिलहाल जंतर-मंतर पर छात्रों का जोश हाई है और आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी है।
